चीन ,शी जिनपिंग
आपको याद होगा पिछ्ले कई दशकों से इस देश चीन ने बहुत इज्ज़त कमाई ,बहुत रुतबा बनाया ..विश्व की पांच महाशक्तियों में से तीसरा नंबर दिया गया चीन को ,,"सिक्योर्टी कौंसिल" में "वीटो पॉवर" भी मिली हुई है ,बड़ी बड़ी आर्थिक शक्तियां ,चीन को 2040 में सबसे पॉवर फुल देश बताने लगे ,अमेरिका से भी पावरफुल होने जा रहा है चीन ,,ऐसा कहा जाने लगा! ...पिछ्ले 30 सालों से चीन अपने 14 पड़ोसी देशों के समुद्र सीमा से लेकर जमीनें तक निगलता हुआ जा रहा था ...निरंकुश चीन ..पावरफुल चीन , सुपर पॉवर चीन ,ज़ालिम चीन ,...जल ज़मीन आकाश तीनों में सर्वश्रेष्ठता को प्राप्त करता जा रहा चीन .......
फिर ...
मोदी जी .का विश्व राजनीती में आगमन और प्रभाव ....
सिर्फ तीन ही साल में हमारे मोदी जी ने उसी निरंकुश ,प्रभावशाली ,ज़ालिम ,पावरफुल ,सुपर पॉवर चीन को "गली का कुत्ता" बना के रख दिया है जो सिर्फ और सिर्फ भोंकना ही जानता है .....इसकी पूरी तरह से कलई खोल कर रख दी है ....पूरे विश्व में शी जिनपिंग का और चीन का मज़ाक सा बना के रख दिया है .....पिछले दो महीने से लगभग हर रोज ही चीनी स्टेबलिशमेंट हमें युद्ध की धमकी दिए जा रही है ......और एक हम हैं ..जो ना उसकी धमकी को सुन रहे है ...ना ही उसका कोई जवाब दे रहें हैं ...यहाँ भारत के आम जन में भी किसी किसम का युद्ध का कोई भी पेनिक तक नहीं दिख रहा ....
बल्कि .....
दिख रहा है ....पागलपन की पराकाष्ठा को प्राप्त करता चीन एवं शी जिनपिंग
ये है मोदी की कूटनीति, जिसने चीन को कूट दिया है, 14 में से 9 पडोसी भारत के साथ है !
चीन हमेशा से ही भारत पर दादागिरी दिखाते हुए आया है
पर डोकलाम के बाद से चीन की फटी हुई है, अब चीन पीछे जायेगा तो उसका सारा रुतबा ख़राब, और भारत भी उसे 1 इंच आगे नहीं बढ़ने दे रहा है
धमकी पर धमकी दे रहा है चीन पर कुछ भी करने की उसकी हैसियत ही नहीं
और उसका सबसे बड़ा कारण आज आपको अच्छे से समझ लेना चाहिए
पहले ये नक्शा देखिये
चीन और उसके पडोसी
भारत को छोड़कर चीन के मोठे तौर पर 14 पडोसी देश है
भारत के अलावा इनमे से अधिकतर देशों के साथ चीन के बड़े विवाद भी है
भारत से अधिक विवाद तो वियतनाम, जापान और मुख्य तौर पर ताइवान के साथ है
इनमे से भी वियतनाम और ताइवान तो ऐसे देश है, जो बस मौके की ताक में है, चीन से इनका विवाद इतना गहरा है की भारत और चीन का कोई बड़ा युद्ध होता है
तो चीन को सबसे ज्यादा डर वियतनाम और ताइवान का है
डोकलाम मुद्दे पर 14 में से 9 देश भारत के साथ है
वहीँ 2 देश तो बिलकुल निष्पक्ष है, न वो चीन के साथ है और न ही भारत के साथ
वहीँ केवल 3 ही ऐसे देश है जो चीन के साथ खड़े हो सकते है, इनमे से भी सिर्फ पाकिस्तान पर ही चीन भरोसा कर सकता है
और भारत के साथ अगर कोई बड़ा युद्ध हुआ तो भारत से तो निपटना ही होगा
साथ ही साथ वियतनाम और ताइवान कब हमला करें ये चीन भी नहीं जानता, ताइवान की महिला राष्ट्रप्रमुख तो बीजिंग में ताइवान का झंडा गाड़ने की बातें करती हैं
ये मोदी की ही कूटनीति है
वियतनाम से ब्रह्मोस डील की बातें चलाई जा रही है, वहीं ताइवान से भी अच्छे सम्बन्ध स्थापित किये जा रहा है
और इसी कारण चीन भारत पर हमले की केवल धमकियाँ ही दे रहा है, उसकी बुरी तरह फटी हुई है
जय श्री राम
वन्देमातरम
आपको याद होगा पिछ्ले कई दशकों से इस देश चीन ने बहुत इज्ज़त कमाई ,बहुत रुतबा बनाया ..विश्व की पांच महाशक्तियों में से तीसरा नंबर दिया गया चीन को ,,"सिक्योर्टी कौंसिल" में "वीटो पॉवर" भी मिली हुई है ,बड़ी बड़ी आर्थिक शक्तियां ,चीन को 2040 में सबसे पॉवर फुल देश बताने लगे ,अमेरिका से भी पावरफुल होने जा रहा है चीन ,,ऐसा कहा जाने लगा! ...पिछ्ले 30 सालों से चीन अपने 14 पड़ोसी देशों के समुद्र सीमा से लेकर जमीनें तक निगलता हुआ जा रहा था ...निरंकुश चीन ..पावरफुल चीन , सुपर पॉवर चीन ,ज़ालिम चीन ,...जल ज़मीन आकाश तीनों में सर्वश्रेष्ठता को प्राप्त करता जा रहा चीन .......
फिर ...
मोदी जी .का विश्व राजनीती में आगमन और प्रभाव ....
सिर्फ तीन ही साल में हमारे मोदी जी ने उसी निरंकुश ,प्रभावशाली ,ज़ालिम ,पावरफुल ,सुपर पॉवर चीन को "गली का कुत्ता" बना के रख दिया है जो सिर्फ और सिर्फ भोंकना ही जानता है .....इसकी पूरी तरह से कलई खोल कर रख दी है ....पूरे विश्व में शी जिनपिंग का और चीन का मज़ाक सा बना के रख दिया है .....पिछले दो महीने से लगभग हर रोज ही चीनी स्टेबलिशमेंट हमें युद्ध की धमकी दिए जा रही है ......और एक हम हैं ..जो ना उसकी धमकी को सुन रहे है ...ना ही उसका कोई जवाब दे रहें हैं ...यहाँ भारत के आम जन में भी किसी किसम का युद्ध का कोई भी पेनिक तक नहीं दिख रहा ....
बल्कि .....
दिख रहा है ....पागलपन की पराकाष्ठा को प्राप्त करता चीन एवं शी जिनपिंग
ये है मोदी की कूटनीति, जिसने चीन को कूट दिया है, 14 में से 9 पडोसी भारत के साथ है !
चीन हमेशा से ही भारत पर दादागिरी दिखाते हुए आया है
पर डोकलाम के बाद से चीन की फटी हुई है, अब चीन पीछे जायेगा तो उसका सारा रुतबा ख़राब, और भारत भी उसे 1 इंच आगे नहीं बढ़ने दे रहा है
धमकी पर धमकी दे रहा है चीन पर कुछ भी करने की उसकी हैसियत ही नहीं
और उसका सबसे बड़ा कारण आज आपको अच्छे से समझ लेना चाहिए
पहले ये नक्शा देखिये
चीन और उसके पडोसी
भारत को छोड़कर चीन के मोठे तौर पर 14 पडोसी देश है
भारत के अलावा इनमे से अधिकतर देशों के साथ चीन के बड़े विवाद भी है
भारत से अधिक विवाद तो वियतनाम, जापान और मुख्य तौर पर ताइवान के साथ है
इनमे से भी वियतनाम और ताइवान तो ऐसे देश है, जो बस मौके की ताक में है, चीन से इनका विवाद इतना गहरा है की भारत और चीन का कोई बड़ा युद्ध होता है
तो चीन को सबसे ज्यादा डर वियतनाम और ताइवान का है
डोकलाम मुद्दे पर 14 में से 9 देश भारत के साथ है
वहीँ 2 देश तो बिलकुल निष्पक्ष है, न वो चीन के साथ है और न ही भारत के साथ
वहीँ केवल 3 ही ऐसे देश है जो चीन के साथ खड़े हो सकते है, इनमे से भी सिर्फ पाकिस्तान पर ही चीन भरोसा कर सकता है
और भारत के साथ अगर कोई बड़ा युद्ध हुआ तो भारत से तो निपटना ही होगा
साथ ही साथ वियतनाम और ताइवान कब हमला करें ये चीन भी नहीं जानता, ताइवान की महिला राष्ट्रप्रमुख तो बीजिंग में ताइवान का झंडा गाड़ने की बातें करती हैं
ये मोदी की ही कूटनीति है
वियतनाम से ब्रह्मोस डील की बातें चलाई जा रही है, वहीं ताइवान से भी अच्छे सम्बन्ध स्थापित किये जा रहा है
और इसी कारण चीन भारत पर हमले की केवल धमकियाँ ही दे रहा है, उसकी बुरी तरह फटी हुई है
जय श्री राम
वन्देमातरम
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