आदर्श सिंह जी का तथ्यपरक विश्लेषण । अवश्य पढ़ें ।
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मगरमच्छ से लव
लीपापोती की कोशिश काफी देर तक कामयाब हुई पर पूरी तरह नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार एनआईए को "लव जिहाद" की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रगतिशील जनों का प्रचार कामयाब नहीं हुआ कि "लव जिहाद " मुस्लिम द्वेषी भाजपा की काल्पनिक उड़ान है और यह मुद्दा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए उछाला जा रहा है। देश की शीर्ष जांच एजेंसी एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि कल्पना की उड़ान जैसा कुछ नहीं है इसमें, यह कड़वी हकीकत है।
शब्द नया था तो लोगों को लगा कि यह कोई नए किस्म का जिहाद है। बिलकुल नहीं। यह पांच दशक से जारी है और अब बहुत परिष्कृत रूप ले चुका है। उत्तर भारत में लोगों ने इसका नाम रांची की रहने वाली राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियन तारा शाहदेव और रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हुसैन के मामले के बाद सुना। पर केरल व कनार्टक में यह ब्लू व्हेल हजारों युवतियों को लील चुकी है।
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दशकों से जारी
सच यह है कि लव जिहाद 45 साल से चल रहा अभियान है। चार दशक पूर्व इसे मिस्र में कॉप्ट ईसाइयों के साथ आजमाया गया था। इस पर शोध करने वाले स्टीवन ब्राउन के मुताबिक धर्मांतरण के बाद इन लड़कियों की बाकायदा परेड निकाली जाती थी जिसमें आक्रामक इस्लामी नारे लगाए जाते थे। जानबूझ कर परेड को ईसाई मुहल्लों से गुजारा जाता था। बाकायदा कीमत तय होती थी और धर्मांतरित युवती के परिवार की जितनी सामाजिक प्रतिष्ठा होती थी, उसी हिसाब से जिहादी रोमियो को पैसे मिलते थे। वहां हालांकि इन सारी चीजों के लिए पैसे सरकार की खुफिया एजंसियों की तरफ से मिलते थे। यह रेट कार्ड बाकायदा भारत में भी है और धंधा जिहादी चंदे से चलता है।
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मेरा धर्म नीच, इस्लाम सच्चा
अगस्त 1994 में लंदन के वेंबले स्टेडियम में बाकायदा एक भव्य समारोह में एक सिख युवती को इस्लाम में दीक्षित किया गया। धर्मांतरित होने के तुरंत बाद उस युवती ने सिखों के बारे में बेहद अपमानजनक टिप्पणियां की जिसका वहां मौजूद 8000 लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। परेड भी निकाली गई। लंदन को जिहादी लंदनिस्तान यूं ही नहीं कहते। इसके बाद 1995 में ट्रैफल्गर में 2000 मुस्लिमों की भीड़ के बीच दो हिंदू युवतियों को धर्मांतरित किया गया। 2012 में बर्तानवी शहर रोथेरहैम में उजागर हुए सेक्स रैकेट ने पूरे देश को झकझोर दिया। संगठित इस्लामी गिरोहों ने कुछ ही बरसों में इस शहर के 1400 बच्चों को यौन शोषण का शिकार बनाया।
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लंदनिस्तान में लव
काहिरा के बाद से ही लव जिहाद का खास ठिकाना लंदन है। यहां खास तौर से हिंदू व सिख युवतियों को निशाना बनाया गया और इसकी जिम्मेदारी संभाली -हिज्ब उल तहरीर- ने। हिज्ब के पैसे से जिहादी रोमियो बाकायदा अखबारों में विज्ञापन देते हैं जिसमें खासतौर से एशियाई और सिख व हिंदू लड़कियों से प्रणय प्रस्ताव मांगे जाते हैं। और फिर उन्हें फंसाकर काहिरा की गलियों की तर्ज पर लंदन में हिंदुओं व सिखों को अपमानित किया जाता है। ब्राउन के मुताबिक पर नस्लीय और धार्मिक भेदभाव के आरोप के डर से पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। हिज्ब की ओर से जारी दिशानिर्देशों में मुस्लिम युवकों को खासतौर से अनाथ, तलाकशुदा मां-बाप के बच्चों और बदसूरत लड़कियों को निशाना बनाने की सलाह दी गई है क्योंकि इनके आसानी से चंगुल में फंसने की संभावना रहती है।
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नील से नीलगिरी
लव जिहाद या रोमियो जिहाद भारत में सबसे पहले केरल व इससे सटे कर्नाटक के तटीय इलाके मंगलूर में चर्चा में आया जब यहां हिंदू व ईसाई युवतियों के लापता होने व उनके मुसलमान बन जाने की घटनाओं में अचानक उछाल आया। ईसाई व हिंदू संगठनों के कान खड़े हो गए। केरल में कैथोलिक ईसाई समुदाय के एक प्रमुख नेता फादर जानी कोचुमपरंबिल ने चर्च काऊंसिल के एक न्यूजलेटर में लिखा कि 2005 से 2009 के बीच केरल में तकरीबन चार हजार गैर मुस्लिम लड़कियों का मुस्लिम युवकों से विवाह कर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित किया जा चुका है। उन्होंने इस दौरान धर्मांतरित हो चुकीं 2868 लड़कियों की बाकायदा सूची भी जारी की। हालांकि हिंदू संगठन धर्मांतरित युवतियों की तादाद तीस हजार बताते हैं जो स्वाभाविक तौर पर ज्यादा है। पर सैयद वाजिद अली के आलेख- "लव जिहाद - ए मिथ ऑर मिशन" के आंकड़ों को कुछ हद तक सही माना जा सकता है। अली ने केरल पुलिस के क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों और कोच्चि विश्वविद्यालय के एडवांस्ड ला स्टडीज के सर्वेक्षण के आधार पर बताया कि केरल में 2006-07 के दौरान लापता लड़कियों की तादाद 2127 और 2008 में 2560 थी।
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क्रूसेडर-बजरंगी भाईचारा
स्थिति गंभीर है। केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (केसीबीसी) ने ईसाई अभिभावकों के लिए एक दिशानिर्देश जारी कर उन्हें अपनी बेटियों को जिहादी मजनुओं से सतर्क करने को कहा। केसीबीसी के विजिलेंस कमीशन फॉर सोशल हारमनी ने 2009 से ही इस बारे में ईसाइयों को जागरूक करने का अभियान छेड़ रखा है। केरल में इस मुद्दे पर ईसाई व हिंदू संगठनों में गजब का एका है। ग्लोबल काउंसिल आफ इंडियन क्रिश्चियन के मुताबिक लव जिहाद इस्लामीकरण के वैश्विक अभियान का हिस्सा है। कोच्चि स्थित क्रिश्चियन एसोसिएशन फॉर सोशल एक्शन तो कहता है कि लव जिहाद से मुकाबले के लिए वह विश्व हिंदू परिषद के साथ है।
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धर्मांतरण है पर लव जिहाद कहां?
इस मुद्दे पर होहल्ला बढ़ गया। तब 2009 में मामला केरल व कर्नाटक के उच्च न्यायालयों में पहुंचा। दोनों ही राज्यों की पुलिस ने हाई कोर्ट को बताया कि उनके राज्यों में गैर मुस्लिम युवतियों के लापता होने और उनके धर्मांतरण के मामलों में खासा इजाफा हुआ है पर इसके पीछे किसी संगठित साजिश के सबूत नहीं हैं। कर्नाटक हाई कोर्ट को अक्तूबर, 2009 में सौंपी गई सौपी गई रिपोर्ट में पुलिस ने कहा कि फिलहाल किसी संगठित साजिश के सबूत नहीं हैं पर लगता है कि कुछ मामलों में जबरन और पैसे का लालच देकर धर्मांतरण हुआ है। न्यामूर्ति केटी शंकरण ने सीआईडी की रिपोर्ट पर अविश्वास जताते हुए पूछा कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर गुमशुदगी और धर्मांतरण की कोई वजह कैसे नहीं?
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एक सेकुलर बेचैनी
सेक्यूलर समुदाय के लिए अप्रत्याशित सवाल था। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायपालिका लव जिहाद को जबरन एक सत्य या साजिश के तौर पर स्थापित करना चाहती है (न्यायपालिका भी सांप्रदायिक हुए जा रही)। तारा-रकीबुल प्रकरण के बाद इसी एक मुद्दे को खास तौर से तवज्जो देते हुए न्यायपालिका तक को सांप्रदायिक साबित करने की कोशिश की गई। यह पहला मामला है जिसमें सीआईडी की रिपोर्ट इतनी पवित्र हो गई कि हाई कोर्ट के जज ने उस पर सवाल उठा कर गुनाह कर दिया?
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आतंकी कोण
हालांकि खुद पुलिस और खुफिया एजंसियों की रिपोर्टें एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करती हैं। इनके मुताबिक यह विदेशी पैसे से चलने वाला वैश्विक इस्लामीकरण के अभियान का हिस्सा है। साबित करने के लिए सबूत भी हैं। कुछ साल पहले केरल के एनार्कुलम जेल में बंद वी नौशाद को सिम कार्ड पहुंचाने की कोशिश में चेरियन नाम की एक ईसाई महिला को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि चेरियन पहले से विवाहित महिला थी और ये दोनों दुबई में मिले थे जहां नौशाद ड्राईवर का काम करता था। उसके प्रेमजाल में फंसने के बाद यह महिला चुपचाप दुबई से केरल भाग आई। नौशाद दक्षिण भारत में लश्कर के शीर्ष कमांडर वी नजीर का करीबी था और उस तक पहुंचने के लिए वह मादक पदार्थों की तस्करी के एक फर्जी केस में जेल में बंद हुआ। बाद में उसने नजीर के लिए ही चेरियन के मार्फत सिम कार्ड मंगवाए।
एक रिपोर्ट के मुताबिक लव जिहाद के चंगुल में फंसी अब तक 4000 से ज्यादा युवतियों को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। बहुत सी युवतियां खाड़ी देशों के अमीर शेखों को बेच दी जाती हैं। घटोत्कच की तरह बगदादी भाई के अकस्मात उदय से बहुत पहले से यह जिहाद जारी है।
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कांग्रेसी मान लें तो वोट कट जाएंगे
सितंबर 2012 में केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने विधानसभा में बताया कि 2006 से अब तक 2500 युवतियां इस्लाम में धर्मांतरित हो चुकी हैं। लेकिन- फिर भी बलात धर्मांतरण या लद जिहाद जैसी किसी चीज के बारे में कोई सबूत नहीं हैं। इस प्रमाणपत्र के पीछे मुस्लिम लीग के समर्थन से सरकार चलाने की मजबूरी थी। केरल में इस समूचे अभियान का सूत्रधार माने जाने वाले चरमपंथी संगठन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने इससे गदगद होकर कहा कि इस्लाम को बदनाम करने की साजिश बेनकाब हो गई है। साथ ही धर्मनिरपेक्षता और कानून के हवाले से कहा- धर्मांतरण कोई अपराध नहीं। इस सेकुलरिज्म पर कौन न बलिहारी हो जाए जहां जिहाद व कानून एक ही घाट पर पानी पीएं।
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और कम्युनिस्ट शीर्षासन
उधर, माकपा के कद्दावर नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी अच्युतानंदन सैकड़ों बार सार्वजनिक रूप से कहते रहे कि पीएफआई -पैसे और धर्मांतरण- के बूते अगले बीस साल में केरल के इस्लामीकरण पर आमादा है। उनके मुताबिक पैसे के बल पर लोगों को धर्मांतरित कर, उनसे विवाह कर और बच्चे पैदा कर केरल में मुस्लिमों की तादाद बढ़ाना चाहता है। कम्यिनस्टों ने कहा, बुढ़ौती में अच्युतानंदन का दिमाग ठसक गया है।
वैसे कई रिपोर्टों में इसके लिए खाड़ी देशों से और यहां तक कि दाऊद इब्राहिम भाई की जेब से भी बड़े पैमाने पर पैसे आने की ओर इशारा किया जा चुका है।
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मगरमच्छ से लव
लीपापोती की कोशिश काफी देर तक कामयाब हुई पर पूरी तरह नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार एनआईए को "लव जिहाद" की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रगतिशील जनों का प्रचार कामयाब नहीं हुआ कि "लव जिहाद " मुस्लिम द्वेषी भाजपा की काल्पनिक उड़ान है और यह मुद्दा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए उछाला जा रहा है। देश की शीर्ष जांच एजेंसी एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि कल्पना की उड़ान जैसा कुछ नहीं है इसमें, यह कड़वी हकीकत है।
शब्द नया था तो लोगों को लगा कि यह कोई नए किस्म का जिहाद है। बिलकुल नहीं। यह पांच दशक से जारी है और अब बहुत परिष्कृत रूप ले चुका है। उत्तर भारत में लोगों ने इसका नाम रांची की रहने वाली राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियन तारा शाहदेव और रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हुसैन के मामले के बाद सुना। पर केरल व कनार्टक में यह ब्लू व्हेल हजारों युवतियों को लील चुकी है।
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दशकों से जारी
सच यह है कि लव जिहाद 45 साल से चल रहा अभियान है। चार दशक पूर्व इसे मिस्र में कॉप्ट ईसाइयों के साथ आजमाया गया था। इस पर शोध करने वाले स्टीवन ब्राउन के मुताबिक धर्मांतरण के बाद इन लड़कियों की बाकायदा परेड निकाली जाती थी जिसमें आक्रामक इस्लामी नारे लगाए जाते थे। जानबूझ कर परेड को ईसाई मुहल्लों से गुजारा जाता था। बाकायदा कीमत तय होती थी और धर्मांतरित युवती के परिवार की जितनी सामाजिक प्रतिष्ठा होती थी, उसी हिसाब से जिहादी रोमियो को पैसे मिलते थे। वहां हालांकि इन सारी चीजों के लिए पैसे सरकार की खुफिया एजंसियों की तरफ से मिलते थे। यह रेट कार्ड बाकायदा भारत में भी है और धंधा जिहादी चंदे से चलता है।
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मेरा धर्म नीच, इस्लाम सच्चा
अगस्त 1994 में लंदन के वेंबले स्टेडियम में बाकायदा एक भव्य समारोह में एक सिख युवती को इस्लाम में दीक्षित किया गया। धर्मांतरित होने के तुरंत बाद उस युवती ने सिखों के बारे में बेहद अपमानजनक टिप्पणियां की जिसका वहां मौजूद 8000 लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। परेड भी निकाली गई। लंदन को जिहादी लंदनिस्तान यूं ही नहीं कहते। इसके बाद 1995 में ट्रैफल्गर में 2000 मुस्लिमों की भीड़ के बीच दो हिंदू युवतियों को धर्मांतरित किया गया। 2012 में बर्तानवी शहर रोथेरहैम में उजागर हुए सेक्स रैकेट ने पूरे देश को झकझोर दिया। संगठित इस्लामी गिरोहों ने कुछ ही बरसों में इस शहर के 1400 बच्चों को यौन शोषण का शिकार बनाया।
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लंदनिस्तान में लव
काहिरा के बाद से ही लव जिहाद का खास ठिकाना लंदन है। यहां खास तौर से हिंदू व सिख युवतियों को निशाना बनाया गया और इसकी जिम्मेदारी संभाली -हिज्ब उल तहरीर- ने। हिज्ब के पैसे से जिहादी रोमियो बाकायदा अखबारों में विज्ञापन देते हैं जिसमें खासतौर से एशियाई और सिख व हिंदू लड़कियों से प्रणय प्रस्ताव मांगे जाते हैं। और फिर उन्हें फंसाकर काहिरा की गलियों की तर्ज पर लंदन में हिंदुओं व सिखों को अपमानित किया जाता है। ब्राउन के मुताबिक पर नस्लीय और धार्मिक भेदभाव के आरोप के डर से पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। हिज्ब की ओर से जारी दिशानिर्देशों में मुस्लिम युवकों को खासतौर से अनाथ, तलाकशुदा मां-बाप के बच्चों और बदसूरत लड़कियों को निशाना बनाने की सलाह दी गई है क्योंकि इनके आसानी से चंगुल में फंसने की संभावना रहती है।
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नील से नीलगिरी
लव जिहाद या रोमियो जिहाद भारत में सबसे पहले केरल व इससे सटे कर्नाटक के तटीय इलाके मंगलूर में चर्चा में आया जब यहां हिंदू व ईसाई युवतियों के लापता होने व उनके मुसलमान बन जाने की घटनाओं में अचानक उछाल आया। ईसाई व हिंदू संगठनों के कान खड़े हो गए। केरल में कैथोलिक ईसाई समुदाय के एक प्रमुख नेता फादर जानी कोचुमपरंबिल ने चर्च काऊंसिल के एक न्यूजलेटर में लिखा कि 2005 से 2009 के बीच केरल में तकरीबन चार हजार गैर मुस्लिम लड़कियों का मुस्लिम युवकों से विवाह कर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित किया जा चुका है। उन्होंने इस दौरान धर्मांतरित हो चुकीं 2868 लड़कियों की बाकायदा सूची भी जारी की। हालांकि हिंदू संगठन धर्मांतरित युवतियों की तादाद तीस हजार बताते हैं जो स्वाभाविक तौर पर ज्यादा है। पर सैयद वाजिद अली के आलेख- "लव जिहाद - ए मिथ ऑर मिशन" के आंकड़ों को कुछ हद तक सही माना जा सकता है। अली ने केरल पुलिस के क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों और कोच्चि विश्वविद्यालय के एडवांस्ड ला स्टडीज के सर्वेक्षण के आधार पर बताया कि केरल में 2006-07 के दौरान लापता लड़कियों की तादाद 2127 और 2008 में 2560 थी।
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क्रूसेडर-बजरंगी भाईचारा
स्थिति गंभीर है। केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (केसीबीसी) ने ईसाई अभिभावकों के लिए एक दिशानिर्देश जारी कर उन्हें अपनी बेटियों को जिहादी मजनुओं से सतर्क करने को कहा। केसीबीसी के विजिलेंस कमीशन फॉर सोशल हारमनी ने 2009 से ही इस बारे में ईसाइयों को जागरूक करने का अभियान छेड़ रखा है। केरल में इस मुद्दे पर ईसाई व हिंदू संगठनों में गजब का एका है। ग्लोबल काउंसिल आफ इंडियन क्रिश्चियन के मुताबिक लव जिहाद इस्लामीकरण के वैश्विक अभियान का हिस्सा है। कोच्चि स्थित क्रिश्चियन एसोसिएशन फॉर सोशल एक्शन तो कहता है कि लव जिहाद से मुकाबले के लिए वह विश्व हिंदू परिषद के साथ है।
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धर्मांतरण है पर लव जिहाद कहां?
इस मुद्दे पर होहल्ला बढ़ गया। तब 2009 में मामला केरल व कर्नाटक के उच्च न्यायालयों में पहुंचा। दोनों ही राज्यों की पुलिस ने हाई कोर्ट को बताया कि उनके राज्यों में गैर मुस्लिम युवतियों के लापता होने और उनके धर्मांतरण के मामलों में खासा इजाफा हुआ है पर इसके पीछे किसी संगठित साजिश के सबूत नहीं हैं। कर्नाटक हाई कोर्ट को अक्तूबर, 2009 में सौंपी गई सौपी गई रिपोर्ट में पुलिस ने कहा कि फिलहाल किसी संगठित साजिश के सबूत नहीं हैं पर लगता है कि कुछ मामलों में जबरन और पैसे का लालच देकर धर्मांतरण हुआ है। न्यामूर्ति केटी शंकरण ने सीआईडी की रिपोर्ट पर अविश्वास जताते हुए पूछा कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर गुमशुदगी और धर्मांतरण की कोई वजह कैसे नहीं?
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एक सेकुलर बेचैनी
सेक्यूलर समुदाय के लिए अप्रत्याशित सवाल था। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायपालिका लव जिहाद को जबरन एक सत्य या साजिश के तौर पर स्थापित करना चाहती है (न्यायपालिका भी सांप्रदायिक हुए जा रही)। तारा-रकीबुल प्रकरण के बाद इसी एक मुद्दे को खास तौर से तवज्जो देते हुए न्यायपालिका तक को सांप्रदायिक साबित करने की कोशिश की गई। यह पहला मामला है जिसमें सीआईडी की रिपोर्ट इतनी पवित्र हो गई कि हाई कोर्ट के जज ने उस पर सवाल उठा कर गुनाह कर दिया?
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आतंकी कोण
हालांकि खुद पुलिस और खुफिया एजंसियों की रिपोर्टें एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करती हैं। इनके मुताबिक यह विदेशी पैसे से चलने वाला वैश्विक इस्लामीकरण के अभियान का हिस्सा है। साबित करने के लिए सबूत भी हैं। कुछ साल पहले केरल के एनार्कुलम जेल में बंद वी नौशाद को सिम कार्ड पहुंचाने की कोशिश में चेरियन नाम की एक ईसाई महिला को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि चेरियन पहले से विवाहित महिला थी और ये दोनों दुबई में मिले थे जहां नौशाद ड्राईवर का काम करता था। उसके प्रेमजाल में फंसने के बाद यह महिला चुपचाप दुबई से केरल भाग आई। नौशाद दक्षिण भारत में लश्कर के शीर्ष कमांडर वी नजीर का करीबी था और उस तक पहुंचने के लिए वह मादक पदार्थों की तस्करी के एक फर्जी केस में जेल में बंद हुआ। बाद में उसने नजीर के लिए ही चेरियन के मार्फत सिम कार्ड मंगवाए।
एक रिपोर्ट के मुताबिक लव जिहाद के चंगुल में फंसी अब तक 4000 से ज्यादा युवतियों को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। बहुत सी युवतियां खाड़ी देशों के अमीर शेखों को बेच दी जाती हैं। घटोत्कच की तरह बगदादी भाई के अकस्मात उदय से बहुत पहले से यह जिहाद जारी है।
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कांग्रेसी मान लें तो वोट कट जाएंगे
सितंबर 2012 में केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने विधानसभा में बताया कि 2006 से अब तक 2500 युवतियां इस्लाम में धर्मांतरित हो चुकी हैं। लेकिन- फिर भी बलात धर्मांतरण या लद जिहाद जैसी किसी चीज के बारे में कोई सबूत नहीं हैं। इस प्रमाणपत्र के पीछे मुस्लिम लीग के समर्थन से सरकार चलाने की मजबूरी थी। केरल में इस समूचे अभियान का सूत्रधार माने जाने वाले चरमपंथी संगठन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने इससे गदगद होकर कहा कि इस्लाम को बदनाम करने की साजिश बेनकाब हो गई है। साथ ही धर्मनिरपेक्षता और कानून के हवाले से कहा- धर्मांतरण कोई अपराध नहीं। इस सेकुलरिज्म पर कौन न बलिहारी हो जाए जहां जिहाद व कानून एक ही घाट पर पानी पीएं।
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और कम्युनिस्ट शीर्षासन
उधर, माकपा के कद्दावर नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी अच्युतानंदन सैकड़ों बार सार्वजनिक रूप से कहते रहे कि पीएफआई -पैसे और धर्मांतरण- के बूते अगले बीस साल में केरल के इस्लामीकरण पर आमादा है। उनके मुताबिक पैसे के बल पर लोगों को धर्मांतरित कर, उनसे विवाह कर और बच्चे पैदा कर केरल में मुस्लिमों की तादाद बढ़ाना चाहता है। कम्यिनस्टों ने कहा, बुढ़ौती में अच्युतानंदन का दिमाग ठसक गया है।
वैसे कई रिपोर्टों में इसके लिए खाड़ी देशों से और यहां तक कि दाऊद इब्राहिम भाई की जेब से भी बड़े पैमाने पर पैसे आने की ओर इशारा किया जा चुका है।
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