Friday, 25 August 2017

भारतीय रेल और सुरेश प्रभु

#भारतीयरेल_1

सड़क किनारे फुटपाथ पे बने भोजनालय में लोगों को खाना खाते देखा है ?
ऐसे भोजनालय बड़े शहरों महानगरों में अक्सर फुटपाथ पे दिख जाते हैं ।
10 - 20 रु में भर पेट खाना खिला देते हैं आज भी ।
पानी जैसी दाल जिसे दाल नही बल्कि पीला पानी कहना चाहिए । साथ मे दो या 4 रोटी और भात । हो गया खाना ।
आपको इस सड़कछाप भोजनालय में बैठ के किसी बड़े रेस्त्रां वाली सर्विस की उम्मीद नही करनी चाहिए ।
आजकल ठीक ठाक ढाबे में भी दाल fry 80 रु की है और एक आदमी का भोजन का बिल औसतन 250 रु आता है ।
आपको 20 रु वाले भोजनालय से उस AC रेस्त्रां वाली सर्विस और साफ सफाई की उम्मीद नही करनी चाहिए ।
पर हमारी दशा उस ग्राहक वाली है जो एक बार किसी बहुत महंगे अच्छे रेस्त्रां में हो आया है , वहां का तौर तरीका देख आया है । और अब यहां फुटपाथ पे सड़क किनारे उड़ती धूल धक्कड़ और भिनभिनाती मक्खियों के बीच बैठा अंग्रेजी में order पेल रहा है कि भैया Menu लाओ .........

भारतीय रेल की दशा तो उस फुटपाथ वाले भोजनालय से भी बदतर है ।
क्या आप जानते हैं कि भारतीय रेल दुनिया का सबसे सस्ती परिवहन सेवा है ?
और इसे चला कौन रहा है ? दुनिया का सबसे निकम्मा , कामचोर , काहिल ,भ्रष्ट तंत्र ...... जिसमे राजनेता , अफसर , कर्मचारी  , ठेकेदार सब शामिल हैं ..........
और ये बेचारी रेल प्रतिदिन सवा दो करोड़ सूअरों को ढोती है , वो जिन्हें न उठने बैठने , खाने पीने , हगने , मूतने , थूकने , खखारने ........किसी चीज़ की तमीज नही ........

क्या आप जानते हैं कि आज से 3 साल पहले भारतीय रेल में 50 km यात्रा करने का टिकट 7 रु था जो आजकल बहुत बहुत ज़्यादा महंगा हो के 10 रु का हो गया है ।
वैसे अगर आप रोज़ यात्रा करते हैं तो MST बनवा के ये यात्रा आप 2 रु प्रतिदिन में भी कर सकते हैं ।

आपकी समस्या ये है कि आपको 2 रु में अमूल मक्खन की पूरी टिक्की के Fry की हुई दाल मखनी चाहिए ।
आपको ये पता होना चाहिए कि विकसित देशों में रेल यात्रा हवाई जहाज से ज़्यादा महंगी है ।
भारतीय रेल पिछले 70 साल से गड्ढे में गिरी हुई थी । लालू , रामविलास पासवान और ममता बनर्जी ने तो रेल का एकदम खून ही चूस लिया । आज़ाद भारत मे पहली बार कोई रेल मंत्री आया जिसने रेल का कायाकल्प करना शुरू किया है । आप पूरे देश मे रेल से घूम आइये , चप्पे चप्पे पे आपको काम होता दिखेगा । रेल में सबसे ज़्यादा मौतें मानव रहित रेल crossing पे होती थीं जिसपे किसी ने ध्यान न दिया ।
सुरेश प्रभु ने ये बीड़ा उठाया और 2019 से पहले एक भी Unmanned railway crossing नही रहेगी । युद्ध स्तर पे इनके नीचे Under pass बनाये जा रहे हैं ।
रेलवे स्टेशनों का विकास हो रहा है ।
जहां सिंगल लाइन है वहां दोहरीकरण और व्यस्त मार्गों पे DFC मने Dedicated Freight Corridor  बनाये जा रहे हैं । रेलमार्गों का विद्युतीकरण चल रहा है ।
स्टेशनों पे सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं ।
भारतीय रेल दुनिया का सबसे खस्ताहाल , सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त रेल network है जो दुनिया मे सबसे ज़्यादा सूअरों की ढुलाई तकरीबन मुफ्त में करता है ।

सिर्फ एक आदमी से ही आस है ....... सुरेश प्रभु से ........ उसका भी आप इस्तीफा मांग लीजिये ।

अजित सिंह उदयन वाले

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