BJP सरकार में सुनवाई हुई, BJP सरकार में सजा हुई, कांग्रेस ने 10 साल सिर्फ वोटबैंक देखा
साध्वी ने बाबा राम रहीम के खिलाफ रेप का आरोप 2002 में लगाया था, उस समय भी बाबा पावरफुल थे, साध्वी की शिकायत किसी ने नहीं सुनी, ना पुलिस, ना कानून और ना ही प्रशासन ने उसकी शिकायत सुनी. मजबूर होकर साध्वी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को चिट्ठी लिखी और अपना दुखड़ा कह सुनाया. साध्वी ने चिट्ठी में इतनी विचलित कर देने वाली बातें लिखी थीं कि अटल बिहारी का मन व्यथित हो गया और उन्होने तुरंत ही इस मामले की CBI जांच का आदेश दे दिया.
2004 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार चली गयी और उनके स्थान पर कांग्रेस की सरकार बनी और 10 साल तक केंद्र में सरकार रही. यही नहीं 10 साल तक हरियाणा में भी कांग्रेस की सरकार रही लेकिन उस समय बाबा राम रहीम पर हाथ लगाने की किसी में हिम्मत नहीं हुई.
अगर अटल बिहारी वाजपेयी 2004 में फिर से प्रधानमंत्री बन गए होते तो बहुत पहले बाबा राम रहीम को सजा मिल गयी होती और उनका इतना बड़ा साम्राज्य ना खड़ा हो पाता लेकिन कांग्रेस सरकार की उन पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं हुई, उस समय ना हाई कोर्ट जागा और ना ही CBI जागी. कांग्रेस उस समय अपना वोट बैंक देख रही थी लेकिन बीजेपी ने वोट बैंक नहीं देखा.
अब केंद्र में मोदी सरकार है जो CBI जाग गयी है. हरियाणा में भी बीजेपी सरकार है तो हाई कोर्ट भी जाग गया है. तीन साल पहले CBI ने मामले की जांच शुरू की और आज तीन साल बाद मोदी सरकार की ताकत देखकर बाबा पर हाथ डाल दिया गया. बाबा राम रहीम ने जबरजस्त ताकत का प्रदर्शन किया लेकिन उनकी ताकत के आगे मोदी और खट्टर सरकार नहीं झुकी. आज उन्हें रेप मामले में दोषी साबित कर दिया गया और जेल भेज दिया गया.
कहने का मतलब ये है कि बीजेपी सरकार में ही साध्वी की शिकायत सुनी गयी और सीबीआई जांच के आदेश दिए गए, बीच में 10 साल तक कांग्रेस सरकार रही तो फाइल आगे नहीं बढ़ी लेकिन जैसे ही केंद्र और राज्य में बीजेपी सरकार आयी, CBI जाग गयी. हरियाणा हाई कोर्ट भी जाग गया, हाई कोर्ट ने आदेश दिया, सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया, आज सजा सुनाई गयी और बाबा राम रहीम सलाखों के पीछे पहुँच गए
साध्वी ने बाबा राम रहीम के खिलाफ रेप का आरोप 2002 में लगाया था, उस समय भी बाबा पावरफुल थे, साध्वी की शिकायत किसी ने नहीं सुनी, ना पुलिस, ना कानून और ना ही प्रशासन ने उसकी शिकायत सुनी. मजबूर होकर साध्वी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को चिट्ठी लिखी और अपना दुखड़ा कह सुनाया. साध्वी ने चिट्ठी में इतनी विचलित कर देने वाली बातें लिखी थीं कि अटल बिहारी का मन व्यथित हो गया और उन्होने तुरंत ही इस मामले की CBI जांच का आदेश दे दिया.
2004 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार चली गयी और उनके स्थान पर कांग्रेस की सरकार बनी और 10 साल तक केंद्र में सरकार रही. यही नहीं 10 साल तक हरियाणा में भी कांग्रेस की सरकार रही लेकिन उस समय बाबा राम रहीम पर हाथ लगाने की किसी में हिम्मत नहीं हुई.
अगर अटल बिहारी वाजपेयी 2004 में फिर से प्रधानमंत्री बन गए होते तो बहुत पहले बाबा राम रहीम को सजा मिल गयी होती और उनका इतना बड़ा साम्राज्य ना खड़ा हो पाता लेकिन कांग्रेस सरकार की उन पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं हुई, उस समय ना हाई कोर्ट जागा और ना ही CBI जागी. कांग्रेस उस समय अपना वोट बैंक देख रही थी लेकिन बीजेपी ने वोट बैंक नहीं देखा.
अब केंद्र में मोदी सरकार है जो CBI जाग गयी है. हरियाणा में भी बीजेपी सरकार है तो हाई कोर्ट भी जाग गया है. तीन साल पहले CBI ने मामले की जांच शुरू की और आज तीन साल बाद मोदी सरकार की ताकत देखकर बाबा पर हाथ डाल दिया गया. बाबा राम रहीम ने जबरजस्त ताकत का प्रदर्शन किया लेकिन उनकी ताकत के आगे मोदी और खट्टर सरकार नहीं झुकी. आज उन्हें रेप मामले में दोषी साबित कर दिया गया और जेल भेज दिया गया.
कहने का मतलब ये है कि बीजेपी सरकार में ही साध्वी की शिकायत सुनी गयी और सीबीआई जांच के आदेश दिए गए, बीच में 10 साल तक कांग्रेस सरकार रही तो फाइल आगे नहीं बढ़ी लेकिन जैसे ही केंद्र और राज्य में बीजेपी सरकार आयी, CBI जाग गयी. हरियाणा हाई कोर्ट भी जाग गया, हाई कोर्ट ने आदेश दिया, सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया, आज सजा सुनाई गयी और बाबा राम रहीम सलाखों के पीछे पहुँच गए
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