Saturday, 19 August 2017

एक कहानी लव जिहाद की

एक पुरानी सत्य घटना ...

 उत्तर प्रदेश में  पूर्वांचल का एक क़स्बा, नाम आप अपने हिसाब से कुछ भी सोच लीजिए | वैसे भी भारत माँ के आँचल  में करोड़ों बारूदी  सुरंगे बिछी हैं | उन्हीं बारूदी सुरंगों  से घिरा एक क़स्बा समझ लीजिए, परिदृश्य की कल्पना आसान हो जाएगी ....

वहीं कस्बे में एक क्षत्रिय परिवार का निवास स्थान था | ठाकुर साहब, पास के सरकारी अस्पताल में डाक्टर थे | पुश्तैनी चल - अचल सम्पत्ति भी पर्याप्त थी ...होली....दशहरा...जन्माष्टमी उत्सव ..माँ के जागरण में.. ठाकुर साहब यथासंभव योगदान करते रहते थे | ठकुराइन भी  धर्म - कर्म में दक्ष थीं ..माने घर में सम्पन्नता के साथ - साथ संस्कार भी जीवित थे |  इस प्रकार  परिवार की मान प्रतिष्ठा में कोई कमी नहीं थी |  

ठाकुर साहब के सन्तान के नाम पर दो बेटियाँ थीं  | समय बीतता गया और देखते ही देखते बड़ी बेटी इंटर कालेज में जाने लगी | गौर वर्ण , माता - पिता द्वारा प्रदत्त अच्छी कद - काठी, ऊपर से  खान - पान, परवरिश और पहनावे में कोई कमी नहीं | बालिका ग्यारहवीं कक्षा में ही थी कि बारूदी सुरंगों में निवास करने वाली सर्प मण्डली के आँखों चढ़ गयी |

बालिका के पीछे एक "अजगर" ..न न .."असगर" आगे से "अजगर" ही  लिखूंगा,  लग गया  | सुनियोजित ढंग से लगाया गया या स्वयं लग गया , कुछ कह पाना मुश्किल है; पर क्या  फर्क पड़ता है ..यहाँ भी खरबूजे और चाकू वाली कहावत चरितार्थ होती है |

इस कार्य के लिए एक सर्पणी ...गुल्लो गुलछम्मों लबेदरिया तमन्ना बेगम ( परिवर्तित पर असली नाम से मिलता-जुलता नाम ) को बालिका से मित्रता के लिए भेजा गया | ग्यारहवीं कक्षा में स्वविवेक होता ही कितना है ? ...ऊपर से  गंगा - जमुना  वाला कीचड़ हर जगह उफान मार कर बह ही रहा है | बालिका  कुछ ही दिनों में "गुल्लो गुलछम्मों लबेदरिया तमन्ना बेगम" की घनिष्ठ सखी हो गयी | साथ उठना - बैठना ..खाना-पीना ..घूमना - फिरना ....माने सेकुलर भारत की सच्ची तस्बीर वहीं क्लास में उभरने लगी |

फिर सर्पणी ने एक दिन मौका देखकर पहला विष-वमन अर्थात अजगर मियां का आँशुओं से भीगा, इत्र से सुवासित और रक्त से लिखित पहला पत्र बालिका के हाथ में रख  दिया | साथ में  सूचना कि  उधर अजगर भाई मजनू की राह पर चलते हुए गली - गली, लैला - लैला फुफकारते ..अहा पुकारते हुए अपना सर पत्थर पर पटक रहे  हैं  |
जुम्मे के जुम्मे एकतरफा पत्र लगातार  आते रहे और साथ में मजनू के बिगडती हालत की खबर भी मिलती रही |

आधुनिक हिन्दू घरों में  कितना भी संस्कार जीवित हो  शाहरुख़ और सलमान का छायाचित्र भी जिवंत रहता ही है  | आधुनिकता और विकास के नाम पर हमने अब बच्चों को जौहर की कथायें बताना छोड़ दिया है ..सावित्री, अनुसुइया...जीजाबायी के मार्ग पर चलने वाली गृहणियां आज कल क्लियोपेट्रा और मैडोना की कहानियाँ चटकारे लेकर पढ़ती हैं | यह बात तो पुरानी है आजकल तो कई घरों में सनी लियोन का नाम भी आदर के साथ लिया जाता है |  मतलब संस्कार की दीवार बाहर से जितनी मजबूत दिखती है असल में उससे सैकड़ों गुना कमजोर होती है |    

 कहते हैं रोज हथौंडा मारो तो पत्थर भी टूट जाता है | यहाँ तो संस्करों का पतला सा कवच था ..ऊपर से कच्ची उमर ...सो दो - तीन महीने में टूट गया और खतों का सिलसिला एक तरफ़ा से दो तरफ़ा हो गया | फिर क्या था ..अजगर तो तैयार बैठा ही था, शिकार को दबोचते देर न लगी | पहले  प्यार फिर वासना की  पींगे हिलोरे मारने लगीं |  प्यार के  पींगों की स्वर लहरी एक दिन ठकुराइन माने बालिका के  माता जी  के कानों तक पहुँच गयी | फिर क्या था ...क्रोधाग्नि धधक उठी और वात्सल्य से भरी आँखों में सुनामी छा  गई  | जौहर की तमाम गाथाएं रक्त शिराओं में अचानक प्रवाहित हो गयीं और क्षत्राणी ने धर्म को संतान मोह से ऊपर रक्खा  |

उसी रात बालिका ने हृदयगति रुकने के कारण इस नश्वर संसार से पलायन किया और अगली सुबह  चित्रगुप्त महराज के दरबार में  देखी  गयी |  कहने वाले अपनी - अपनी कहते रहे पर विद्व जनों ने इस घटना को  एक क्षत्रिय परिवार द्वारा  अपने पूर्वजों के यशो - कीर्ति की रक्षा का दायित्व निर्वहन कहा  ...

काफी समय पश्चात बालिका की माँ ने कहा कि," बालिका का जीवन तो तभी नष्ट हो गया था जब वह सर्पणी और अजगर के फंदे में फंसी थी,  उसके पास दो ही विकल्प थे या तो शेष जीवन किसी नरक भरी बदनाम गली में बिताती या फिर दर्जन भर सर्प पैदा करते हुए स्वयं नरक की खान बन जाती ...इन सबसे बेहतर उसके लिए नवजीवन ही था जो उसे अवश्य मिला होगा  |"

हो  सकता है कि आप के पास भी कहीं कोई अजगर या सर्पणी घूम रहे हों ..सावधान रहें औरों को सावधान करें ...विशेष रूप से सर्पणी को पहचानें और यथोचित दूरी  बनवा कर चलें .. सब के पास ठकुराइन जैसा कलेजा नहीं होता है | वैसे भी, जानकारी और यथोचित दूरी ही इस विष के प्रभाव से बचने का एक मात्र उपाय है !!


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