पश्चिम बंगाल में हुए नगर निकाय चुनाव परिणामों में ममताबानो की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने सभी 7 नगरपालिका सीटों पर जीत हासिल की है। टीएमसी ने सबसे बड़ी नगरपालिका #दुर्गापुर के साथ-साथ #हल्दिया_और_कूपर्स_कैम्प_नोटिफाइड_एरिया में क्लीन स्विप हासिल कर लिया... इन तीनों नगर निकायों में विपक्षी पार्टी #भाजपा_अपनी_मौजूदगी_भी_दर्ज_नहीं_करा_सकी। काफी जोर आजमाइश करने के बाद भी विपक्षी भाजपा को धुपगुरी नगरपालिका में 16 में से चार सीटें मिलीं...इसके अलावा पार्टी को #पंसकुड़ा_और_बुनियादपुर नगरपालिका में भी एक-एक सीट से ही संतोष करना पड़ा...उधर, सीपीएम की अगुवाई वाले लेफ्ट फ्रंट ने #नलहट्टी_नगरपालिका में जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस एक भी सीट नही जीत पाई।
सभी सात नगरपालिका की कुल 148 सीटों में से 140 पर तृणमूल कांग्रेस और 6 पर बीजेपी जबकि एक-एक सीट पर लेफ्ट फ्रंट और निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई है।
इन परिणामो को देखकर जो राष्ट्रवादी पश्चिम बंगाल में हुए दंगो और वहां हिन्दुओ के साथ हो रहे अत्याचारों पर जीभर कर ममताबनो और उसके दल को कोस रहे थे उन्हें इन चुनाव परिणामो से गहरा धक्का लगा है और वे आश्चर्यचकित हैं कि ये कैसे हो गया...क्योंकि वे शायद #बंगाल_और_बंगालियों_की_मनोवृत्ति_से_अपरिचित_हैं...!!!
=×=×=
बंगाल और बंगालियो की फितरत समझने के लिये एक वाकया काफी है...गौहत्या पर रोक लगाने की जब पूरे देश मे मांग उठ रही थी,
तब पं. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पूरे देश के मीडिया के सामने ये बात कह रही थी कि कोई क्या खाता है ये उसका निजि मामला है, यानि कि "गाय" उसकी नजर मे #एक_खाने_की_वस्तु_भर_है।
नवरात्रि उत्सव के दौरान बंगाल के हिंदूओ ने गौवध पर रोक लगाने कि मांग की क्योकि इससे वहां के कुछ धार्मिक हिंदूओ की भावनाऐ आहत हो रही थी और उन्होने मात्र 9 दिन खुलेआम गौहत्या को रोकने की मांग की किंतु वोटबैंक और तुष्टिकरणवाद मे डूबी मोमताबानो ने गौहत्या पर रोक लगाने से मना कर दिया क्योकि गौहत्या रोकने से उसके वोटबैंक की भावनाऐ आहत हो जाती और उनकी भावनाऐ केवल गाय को खुलेआम सड़क पर काटकर ही सुरक्षित रखी जा सकती है।
पर इतने से भी पं. बंगाल के (कु)बुद्धिजीवी वर्ग को संतुष्टि नही मिली तो उन्होने पूरे देश के सहिष्णु हिंदूओ को अपमानित करने के लिये वहां खुलेआम 'बीफ पार्टी' का आयोजन किया, जिसमे पं. बंगाल के तमाम् सेकुलर, वामपंथी, लेखक, साहित्यकार और राजनेता शामिल हुऐ और पूरे देश के मीडिया के सामने बड़ी बेशर्मी के साथ हंसी के ठहाके लगाकर उन्होने गौमांस खाया।
पूरे बंगाल मे एक भी व्यक्ति या संगठन ने इस घटना का विरोध नही किया, कई लोगो को लगा कि बंगाली जनता अंदरूनी तौर पर अाक्रोशित होगी और विधानसभा चुनावो मे TMC को इस घटना का खामियाजा भुगतना होगा,
पर विधानसभा चुनावो मे जैसा बहुमत ममता को मिला वो सारे देश के सामने है,
इन्ही बंगालियो ने जब पूरी दुनिया से वामपंथ खत्म हो रहा था, तब भी अपने राज्य मे नकली वामपंथियो को सत्ता की चाभी सौंप रखी थी, जब वामपंथ से मन भर गया तो ममता का दामन थाम लिया।
बंगालियो को आज भी अपने "हिंदू" होने पर नही बल्कि "बंगाली" होने पर गर्व करना सिखाया जाता है।भले ही आज #पूरा_बंगाल_बरबाद_होने_की_कगार_पर_खड़ा_है, सारे उद्योग राज्य को छोड़कर जा चुके है, बांग्लादेशी घुसपैठियो ने पूरे राज्य पर कब्जा कर लिया है, बेरोजगारी चरम पर है, पर इन #बंगालियो_को_आज_भी_इस_बात_का "नशा" है कि हमने भारत को 'रविन्द्रनाथ ठाकुर' दिया।
सेकुलरपन और आधुनिकता के नशे के चलते ये हिंदूवादी संगठनो से जुड़ना शर्मनाक और अपमानजनक समझते है, एक तरह से देखा जाये तो #ये_बंगालिये_धरती_पर_चलते_फिरते ''एलियन'' के समान है,
जिन्हे न तो "इतिहास" पता है न "वर्तमान" और न #अपने_मिटते_जा_रहे ''भविष्य'' की कोई खबर है।
पं. बंगाल भले ही 'शक्ति की देवी' #मां_दुर्गा की उपासना भूमि है,
पर आज बंगालियो से अधिक "नि:शक्त" और "कमजोर" पूरे भारत मे कोई नही....!!!
यही हाल रहे तो खुद मां दुर्गा भी इनकी रक्षा न कर पाये...!!!
सभी सात नगरपालिका की कुल 148 सीटों में से 140 पर तृणमूल कांग्रेस और 6 पर बीजेपी जबकि एक-एक सीट पर लेफ्ट फ्रंट और निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई है।
इन परिणामो को देखकर जो राष्ट्रवादी पश्चिम बंगाल में हुए दंगो और वहां हिन्दुओ के साथ हो रहे अत्याचारों पर जीभर कर ममताबनो और उसके दल को कोस रहे थे उन्हें इन चुनाव परिणामो से गहरा धक्का लगा है और वे आश्चर्यचकित हैं कि ये कैसे हो गया...क्योंकि वे शायद #बंगाल_और_बंगालियों_की_मनोवृत्ति_से_अपरिचित_हैं...!!!
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बंगाल और बंगालियो की फितरत समझने के लिये एक वाकया काफी है...गौहत्या पर रोक लगाने की जब पूरे देश मे मांग उठ रही थी,
तब पं. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पूरे देश के मीडिया के सामने ये बात कह रही थी कि कोई क्या खाता है ये उसका निजि मामला है, यानि कि "गाय" उसकी नजर मे #एक_खाने_की_वस्तु_भर_है।
नवरात्रि उत्सव के दौरान बंगाल के हिंदूओ ने गौवध पर रोक लगाने कि मांग की क्योकि इससे वहां के कुछ धार्मिक हिंदूओ की भावनाऐ आहत हो रही थी और उन्होने मात्र 9 दिन खुलेआम गौहत्या को रोकने की मांग की किंतु वोटबैंक और तुष्टिकरणवाद मे डूबी मोमताबानो ने गौहत्या पर रोक लगाने से मना कर दिया क्योकि गौहत्या रोकने से उसके वोटबैंक की भावनाऐ आहत हो जाती और उनकी भावनाऐ केवल गाय को खुलेआम सड़क पर काटकर ही सुरक्षित रखी जा सकती है।
पर इतने से भी पं. बंगाल के (कु)बुद्धिजीवी वर्ग को संतुष्टि नही मिली तो उन्होने पूरे देश के सहिष्णु हिंदूओ को अपमानित करने के लिये वहां खुलेआम 'बीफ पार्टी' का आयोजन किया, जिसमे पं. बंगाल के तमाम् सेकुलर, वामपंथी, लेखक, साहित्यकार और राजनेता शामिल हुऐ और पूरे देश के मीडिया के सामने बड़ी बेशर्मी के साथ हंसी के ठहाके लगाकर उन्होने गौमांस खाया।
पूरे बंगाल मे एक भी व्यक्ति या संगठन ने इस घटना का विरोध नही किया, कई लोगो को लगा कि बंगाली जनता अंदरूनी तौर पर अाक्रोशित होगी और विधानसभा चुनावो मे TMC को इस घटना का खामियाजा भुगतना होगा,
पर विधानसभा चुनावो मे जैसा बहुमत ममता को मिला वो सारे देश के सामने है,
इन्ही बंगालियो ने जब पूरी दुनिया से वामपंथ खत्म हो रहा था, तब भी अपने राज्य मे नकली वामपंथियो को सत्ता की चाभी सौंप रखी थी, जब वामपंथ से मन भर गया तो ममता का दामन थाम लिया।
बंगालियो को आज भी अपने "हिंदू" होने पर नही बल्कि "बंगाली" होने पर गर्व करना सिखाया जाता है।भले ही आज #पूरा_बंगाल_बरबाद_होने_की_कगार_पर_खड़ा_है, सारे उद्योग राज्य को छोड़कर जा चुके है, बांग्लादेशी घुसपैठियो ने पूरे राज्य पर कब्जा कर लिया है, बेरोजगारी चरम पर है, पर इन #बंगालियो_को_आज_भी_इस_बात_का "नशा" है कि हमने भारत को 'रविन्द्रनाथ ठाकुर' दिया।
सेकुलरपन और आधुनिकता के नशे के चलते ये हिंदूवादी संगठनो से जुड़ना शर्मनाक और अपमानजनक समझते है, एक तरह से देखा जाये तो #ये_बंगालिये_धरती_पर_चलते_फिरते ''एलियन'' के समान है,
जिन्हे न तो "इतिहास" पता है न "वर्तमान" और न #अपने_मिटते_जा_रहे ''भविष्य'' की कोई खबर है।
पं. बंगाल भले ही 'शक्ति की देवी' #मां_दुर्गा की उपासना भूमि है,
पर आज बंगालियो से अधिक "नि:शक्त" और "कमजोर" पूरे भारत मे कोई नही....!!!
यही हाल रहे तो खुद मां दुर्गा भी इनकी रक्षा न कर पाये...!!!
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