चीन ने अपनी सेना हटाने की घोषणा करके तीसरे विश्व युद्ध और उसके बाद होने वाले अपने विघटन को बचा लिया। भारत की इस दृढ़ता का चीन के पास कोई जबाब नहीं निकल रहा था। जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, इज़राइल, वियतनाम, दक्षिणी कोरिया, मंगोलिया, बोत्सवाना, होन्ग कॉन्ग, ताइवान, इंडोनेशिया, मलेशिया और कई मेकांग व यूरोपीय देशों की भारत के प्रति समर्थन की प्रतिबद्धता ने चीन को भविष्य की आहट शायद दे दी थी। इसीलिये चीन ने अड़े रहने की बजाय थूक कर चाट लेने में ही अपनी भलाई समझी। इस घटना के बाद विश्व राजनीति में चीन की औकात 2 कौड़ी के कुत्ते जैसी हो गयी है और भारत एक महाशक्ति के तौर पर उभर कर आया है जिसने चीन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। भारत की इस आक्रामक कूटनीति की सफलता के पीछे निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्व मंच पर धमाकेदार कूटनीति एवं विदेशी दौरों का हाथ है।
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