भारत माता की जय !
🙏🏻🇮🇳🚩
कुछ लोग बाबा राम रहीम पर टिप्पणी के बहाने बाबा रामदेव पर टिप्पणी कर रहे हैं कि ये सरकार बाबा राम रहीम की भीड़ को कण्ट्रोल नहीं कर पायी, जबकि कांग्रेस सरकार के राज में बाबा रामदेव को सलवार पहन के भागना पड़ा था।
अब मुझे ये तुलना समझ नहीं आती।
चलिए मान लिया आप बीजेपी के विरोधी हैं..
आपकी नजर में बाबा रामदेव ठग हैं.. तो क्या इसलिए आपकी नजर में आधी रात में सोये हुए लोगों पर, जो लोग पूरी तरह निहत्थे अहिंसक आंदोलन कर रहे थे, उनको आधी रात में लाठी से पीटना और उनपे आंसू गैस चलाना जायज था???? तो फिर दिल्ली पुलिस की ये बहादुरी, जामा मस्जिद के शाही इमाम को पकड़ने के मामले में कहां घुस गई थी ?
अगर यही बात है तो फिर आपकी नजर में जनरल डायर के द्वारा जो जलियांवाला बाग़ में किया गया था वो भी जायज होगा ??
है न !
दूसरी बात, कि लोग इसी बहाने आसाराम बापू और उनके समर्थकों पर भी टिप्पणी कर रहे हैं, तो उनकी जानकारी के लिए भी बता दें कि, बापू आसाराम के समर्थकों ने आज तक हिंसा नहीं की है, बल्कि जांच में पुलिस और न्यायालयों का साथ ही दिया है । मीडिया चैनलों द्वारा आश्रमों की जमीनों को झूठा गैरकानूनी बता कर दुष्प्रचार किये जाने का सुप्रचार से मुकाबला किया है, ये आप आश्रमों में जाकर देख सकते हैं, जो असल में तो चल रहे हैं, पर मीडिया खबरों के अनुसार बंद हैं ।
और सबसे बड़ी बात, बापू आसाराम पर आज तक आरोप साबित नहीं हुआ है । पर ऐसे ही आरोप वाले तरुण तेजपाल जैसों को जमानत मिल चुकी है..
तीसरी बात, सभी साधु संतों को एक ही तराज़ू से तोलने वालों में अगर दम है, तो जामा मस्जिद के शाही इमाम पर, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के हत्यारों पर, कांची कामकोटी पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को झूठे इल्ज़ाम में फंसाने पर, मदर टेरेसा द्वारा किये जाने वाले धर्मांतरण पर, बलात्कार करने वाले ईसाई पादरियों पर, ननों की असल जिंदगी पर और मस्जिदों के मौलवियों पर, कर्नल पुरोहित के निर्दोष होने पर, साध्वी प्रज्ञा के निर्दोष होने पर, और भी न जाने ऐसे कितने केसों पर लिख कर दिखाएँ !!
हम किसी का भी समर्थन या विरोध नहीं कर रहे, हम तो केवल इतना कह रहे हैं कि, अरब व रोम के पैसे पर पालने वाला मीडिया, और भाई भतीजावाद में कंठ तक डूबे, कोलेजियम में सिफारिश से चुने गए अयोग्य जज, क्यों सबके बारे में बराबर राय नहीं रखते ? और तो और, मीडिया में दिखाई और लिखी जा रही हर खबर को सच मानने वाले मूर्ख हिंदुओं का तो कहना ही क्या ! और हाँ, हिंदुओं में सभी आते हैं, फिर चाहे वे स्वयं को हिन्दू माने या नहीं, क्योंकि अरब और रोम उनका भी नंबर लगायेंगें, ये पक्का है !
चौथी और सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि, हिंदुओं में, विभिन्न गुरुओं के चेलों में अब ये बात पक्की हो चली है कि अगला नंबर उनके ही गुरु का है, क्योंकि जज, मीडिया आदि केवल हिंदुओं के त्योहारों, कानूनों, गुरुओं आदि को ही टारगेट कर रहे हैं, और वो भी कुछ वर्ष पहले हुए बलात्कार आदि के मामले में, जिसकी पुष्टि इतने समय बाद मेडिकल जांच में नहीं हो सकती, जिसका कोई गवाह नहीं होता, लाई डिटेक्टर टेस्ट न्यायालयों में मान्य नहीं होता, और न ही ये किया जाता है, तो यही एक आरोप है जिसे साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है..
यहां बात किसी बाबा को निर्दोष साबित करने की नहीं है, बल्कि बात ये है, कि केवल बाबा ही क्यों ? जबकि खबरें तो पादरियों व मौलवियों की भी आती है, परंतु उन्हें राष्ट्रीय आपदा नहीं बनाते, मीडिया वाले !
बाकि, किसी के भी समर्थकों द्वारा हिंसा का हम विरोध करते हैं, और चाहते हैं कि न्यायालय व पुलिस अपना काम ठीक से करें, बिना किसी तुष्टिकरण के.. दोषी चाहे कोई भी हो, किसी भी पन्थ, मज़हब, रिलिजन जा हो, उस सज़ा मिले.. और सबसे बड़ी बात, जो केस न्यायालय में है, उस पर मीडिया अपना न्यायालय न लगाए, क्योंकि मीडिया की झूठी खबरों से ही किसी भी बाबा के भक्त बिगड़ते हैं, न्यायालय का निर्णय आने से पहले किसी भी केस पर मीडिया में चर्चा को कानून बना कर बंद किया जाए । और हाँ, जनता को भी मीडिया पर आंख बंद कर के विश्वास करना बंद करना होगा..
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भारत माता की जय !
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कुछ लोग बाबा राम रहीम पर टिप्पणी के बहाने बाबा रामदेव पर टिप्पणी कर रहे हैं कि ये सरकार बाबा राम रहीम की भीड़ को कण्ट्रोल नहीं कर पायी, जबकि कांग्रेस सरकार के राज में बाबा रामदेव को सलवार पहन के भागना पड़ा था।
अब मुझे ये तुलना समझ नहीं आती।
चलिए मान लिया आप बीजेपी के विरोधी हैं..
आपकी नजर में बाबा रामदेव ठग हैं.. तो क्या इसलिए आपकी नजर में आधी रात में सोये हुए लोगों पर, जो लोग पूरी तरह निहत्थे अहिंसक आंदोलन कर रहे थे, उनको आधी रात में लाठी से पीटना और उनपे आंसू गैस चलाना जायज था???? तो फिर दिल्ली पुलिस की ये बहादुरी, जामा मस्जिद के शाही इमाम को पकड़ने के मामले में कहां घुस गई थी ?
अगर यही बात है तो फिर आपकी नजर में जनरल डायर के द्वारा जो जलियांवाला बाग़ में किया गया था वो भी जायज होगा ??
है न !
दूसरी बात, कि लोग इसी बहाने आसाराम बापू और उनके समर्थकों पर भी टिप्पणी कर रहे हैं, तो उनकी जानकारी के लिए भी बता दें कि, बापू आसाराम के समर्थकों ने आज तक हिंसा नहीं की है, बल्कि जांच में पुलिस और न्यायालयों का साथ ही दिया है । मीडिया चैनलों द्वारा आश्रमों की जमीनों को झूठा गैरकानूनी बता कर दुष्प्रचार किये जाने का सुप्रचार से मुकाबला किया है, ये आप आश्रमों में जाकर देख सकते हैं, जो असल में तो चल रहे हैं, पर मीडिया खबरों के अनुसार बंद हैं ।
और सबसे बड़ी बात, बापू आसाराम पर आज तक आरोप साबित नहीं हुआ है । पर ऐसे ही आरोप वाले तरुण तेजपाल जैसों को जमानत मिल चुकी है..
तीसरी बात, सभी साधु संतों को एक ही तराज़ू से तोलने वालों में अगर दम है, तो जामा मस्जिद के शाही इमाम पर, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के हत्यारों पर, कांची कामकोटी पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को झूठे इल्ज़ाम में फंसाने पर, मदर टेरेसा द्वारा किये जाने वाले धर्मांतरण पर, बलात्कार करने वाले ईसाई पादरियों पर, ननों की असल जिंदगी पर और मस्जिदों के मौलवियों पर, कर्नल पुरोहित के निर्दोष होने पर, साध्वी प्रज्ञा के निर्दोष होने पर, और भी न जाने ऐसे कितने केसों पर लिख कर दिखाएँ !!
हम किसी का भी समर्थन या विरोध नहीं कर रहे, हम तो केवल इतना कह रहे हैं कि, अरब व रोम के पैसे पर पालने वाला मीडिया, और भाई भतीजावाद में कंठ तक डूबे, कोलेजियम में सिफारिश से चुने गए अयोग्य जज, क्यों सबके बारे में बराबर राय नहीं रखते ? और तो और, मीडिया में दिखाई और लिखी जा रही हर खबर को सच मानने वाले मूर्ख हिंदुओं का तो कहना ही क्या ! और हाँ, हिंदुओं में सभी आते हैं, फिर चाहे वे स्वयं को हिन्दू माने या नहीं, क्योंकि अरब और रोम उनका भी नंबर लगायेंगें, ये पक्का है !
चौथी और सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि, हिंदुओं में, विभिन्न गुरुओं के चेलों में अब ये बात पक्की हो चली है कि अगला नंबर उनके ही गुरु का है, क्योंकि जज, मीडिया आदि केवल हिंदुओं के त्योहारों, कानूनों, गुरुओं आदि को ही टारगेट कर रहे हैं, और वो भी कुछ वर्ष पहले हुए बलात्कार आदि के मामले में, जिसकी पुष्टि इतने समय बाद मेडिकल जांच में नहीं हो सकती, जिसका कोई गवाह नहीं होता, लाई डिटेक्टर टेस्ट न्यायालयों में मान्य नहीं होता, और न ही ये किया जाता है, तो यही एक आरोप है जिसे साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है..
यहां बात किसी बाबा को निर्दोष साबित करने की नहीं है, बल्कि बात ये है, कि केवल बाबा ही क्यों ? जबकि खबरें तो पादरियों व मौलवियों की भी आती है, परंतु उन्हें राष्ट्रीय आपदा नहीं बनाते, मीडिया वाले !
बाकि, किसी के भी समर्थकों द्वारा हिंसा का हम विरोध करते हैं, और चाहते हैं कि न्यायालय व पुलिस अपना काम ठीक से करें, बिना किसी तुष्टिकरण के.. दोषी चाहे कोई भी हो, किसी भी पन्थ, मज़हब, रिलिजन जा हो, उस सज़ा मिले.. और सबसे बड़ी बात, जो केस न्यायालय में है, उस पर मीडिया अपना न्यायालय न लगाए, क्योंकि मीडिया की झूठी खबरों से ही किसी भी बाबा के भक्त बिगड़ते हैं, न्यायालय का निर्णय आने से पहले किसी भी केस पर मीडिया में चर्चा को कानून बना कर बंद किया जाए । और हाँ, जनता को भी मीडिया पर आंख बंद कर के विश्वास करना बंद करना होगा..
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