बाबा राम रहीम वंचित वर्ग से हैं...ओर उनके सारे चेले चपाटे भी उसी वर्ग से हैं।
बाबा रामपाल
सन्त आशाराम
रामवृक्ष यादव
भी
या तो ओबीसी या वंचित वर्ग से हैं
और इनका सारा एजेंडा सनातन परम्पराओ से हटकर या उसके विरोध में हैं कुछेक अपवाद को छोड़कर...।
ये लोग न तो किसी शंकराचार्य को मानते हैं
न किसी देवी देवता को
ये किसी भी मत का प्रचार नही करते
बल्कि खुद को ही ईश्वर के तुल्य घोषित करने में लगे रहते हैं... इनके भक्तो के यहां चले जाइये...सबके घर पर देवी देवताओं की जगह इन्ही सन्तो की बड़ी बड़ी तस्वीरें लगी हुई मिलेगी...लॉकेट, साहित्य, भजन, कैसेट, सीडी में भी इन्ही तथाकथित गुरुओं का ही महिमामन्डन मिलेगा।
जब ये सन्त अपने वैभव के चरम पर होते है तब इनको #पाखण्डवाद_के_विरोध के रूप में पूरी दुनिया मे हिंदुत्व की कमियां बताकर इनका गुणगान किया जाता हैं,
पर जैसे ही इनका #पतन_होता हैं #प्रेस्टिट्यूड_मीडिया
इनको #तुरन्त_शंकराचार्य_या_मनु_महाराज के अवतार में पेश करने में लग जाता हैं
और हिन्दु धर्म की खिल्ली उड़ाई जाने लगती हैं।
मतलब "चित भी मेरी और पट भी मेरी"
इन संतो में से एक भी सवर्ण या ब्राह्मण नहीं हैं...और न ये किसी प्राचीन परम्परा या मत के आधार पर चल रहे किसी भी मठ या सम्प्रदाय का संचालन कर रहे थे और आज देश में जितने भी #डेरा_सच्चा_सौदा की तरह नए मठ और सम्प्रदाय चल रहे हैं 90% जगह गैरसवर्ण ही इनको संचालित कर रहे हैं और समाज मे बड़े सन्त और समाज सुधारक के रूप में प्रतिष्ठित हो रहें है...और #दिलीप_चु_मण्डल जैसी मानसिकता के लोग तो इस सारे घटनाक्रम को गैर सवर्णो के खिलाफ सवर्णो साजिश ही करार न दे डालें गैरसवर्णो को समाज में सन्तो के रूप में प्रतिष्ठित होने की इर्ष्या के कारण...उस #Dilip_c_mandal ने कोई पोस्ट डाली क्या इस बारे में...?????
संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के कारण कानूनी तौर पर इन मठों और सम्प्रदायों पर रोक लगाना सम्भव नहीं है...इनको मिलने वाली धनराशि भी पूरी तरह कर मुक्त होती हैं...बड़ी संख्या में समर्थकों का वोटबैंक होने के कारण राजनेता और सरकार भी इनपर हाथ डालने से डरते है पर जिस तरह से पहले रामवृक्ष यादव फिर रामपाल और अब रामरहीम के समर्थको ने उपद्रव मचाकर कानून और प्रशासन की धज्जियां उड़ाई है सरकार को भी इस तरह के मठ, सम्प्रदाय और डेरो पर अंकुश लगाने के लिये किसी कानून या आचार संहिता का निर्माण करना चाहिये...देश में चल रहे सभी सम्प्रदायो और पंथो को लेकर न कि इस बारे में भी तुष्टिकरणवाद के आधार पर नियमावली बना दी जाये...जैसे जब किसी रामरहिम जैसे संत को गिरफ्तार करना होता है तो उन्हे तुरंत कानूनी शिकंजे में ले लिया जाता है पर जब अन्य सम्प्रदाय के किसी धर्मगुरू की बारी आती है तो कानून और प्रशासन को सांप सूंघ जाता है...।
Dhiraj Bhargava
बाबा रामपाल
सन्त आशाराम
रामवृक्ष यादव
भी
या तो ओबीसी या वंचित वर्ग से हैं
और इनका सारा एजेंडा सनातन परम्पराओ से हटकर या उसके विरोध में हैं कुछेक अपवाद को छोड़कर...।
ये लोग न तो किसी शंकराचार्य को मानते हैं
न किसी देवी देवता को
ये किसी भी मत का प्रचार नही करते
बल्कि खुद को ही ईश्वर के तुल्य घोषित करने में लगे रहते हैं... इनके भक्तो के यहां चले जाइये...सबके घर पर देवी देवताओं की जगह इन्ही सन्तो की बड़ी बड़ी तस्वीरें लगी हुई मिलेगी...लॉकेट, साहित्य, भजन, कैसेट, सीडी में भी इन्ही तथाकथित गुरुओं का ही महिमामन्डन मिलेगा।
जब ये सन्त अपने वैभव के चरम पर होते है तब इनको #पाखण्डवाद_के_विरोध के रूप में पूरी दुनिया मे हिंदुत्व की कमियां बताकर इनका गुणगान किया जाता हैं,
पर जैसे ही इनका #पतन_होता हैं #प्रेस्टिट्यूड_मीडिया
इनको #तुरन्त_शंकराचार्य_या_मनु_महाराज के अवतार में पेश करने में लग जाता हैं
और हिन्दु धर्म की खिल्ली उड़ाई जाने लगती हैं।
मतलब "चित भी मेरी और पट भी मेरी"
इन संतो में से एक भी सवर्ण या ब्राह्मण नहीं हैं...और न ये किसी प्राचीन परम्परा या मत के आधार पर चल रहे किसी भी मठ या सम्प्रदाय का संचालन कर रहे थे और आज देश में जितने भी #डेरा_सच्चा_सौदा की तरह नए मठ और सम्प्रदाय चल रहे हैं 90% जगह गैरसवर्ण ही इनको संचालित कर रहे हैं और समाज मे बड़े सन्त और समाज सुधारक के रूप में प्रतिष्ठित हो रहें है...और #दिलीप_चु_मण्डल जैसी मानसिकता के लोग तो इस सारे घटनाक्रम को गैर सवर्णो के खिलाफ सवर्णो साजिश ही करार न दे डालें गैरसवर्णो को समाज में सन्तो के रूप में प्रतिष्ठित होने की इर्ष्या के कारण...उस #Dilip_c_mandal ने कोई पोस्ट डाली क्या इस बारे में...?????
संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के कारण कानूनी तौर पर इन मठों और सम्प्रदायों पर रोक लगाना सम्भव नहीं है...इनको मिलने वाली धनराशि भी पूरी तरह कर मुक्त होती हैं...बड़ी संख्या में समर्थकों का वोटबैंक होने के कारण राजनेता और सरकार भी इनपर हाथ डालने से डरते है पर जिस तरह से पहले रामवृक्ष यादव फिर रामपाल और अब रामरहीम के समर्थको ने उपद्रव मचाकर कानून और प्रशासन की धज्जियां उड़ाई है सरकार को भी इस तरह के मठ, सम्प्रदाय और डेरो पर अंकुश लगाने के लिये किसी कानून या आचार संहिता का निर्माण करना चाहिये...देश में चल रहे सभी सम्प्रदायो और पंथो को लेकर न कि इस बारे में भी तुष्टिकरणवाद के आधार पर नियमावली बना दी जाये...जैसे जब किसी रामरहिम जैसे संत को गिरफ्तार करना होता है तो उन्हे तुरंत कानूनी शिकंजे में ले लिया जाता है पर जब अन्य सम्प्रदाय के किसी धर्मगुरू की बारी आती है तो कानून और प्रशासन को सांप सूंघ जाता है...।
Dhiraj Bhargava
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