इस समय जब कि मैं यह पोस्ट लिख रहा हूँ, बाबा गुरमीत राम रहीम के चेले पंजाब हरयाणा समेत पाँच राज्यों में बवाल काट रहे हैं। जैसा कि मीडिया की भूमिका हमेशा रहती है, आज भी वैसी उतनी ही नकारात्मक है। इसे सरकार का बड़ा फेलियर बताया जा रहा है, कहा जा रहा है कि पंचकुला में दो लाख लोगों को क्यों जुटने दिया गया!
मुझे 1990 का अयोध्या का राम जन्मभूमि आंदोलन याद आता है, मुल्लायम जादों ने सात दिन पहले ही फैज़ाबाद संभाद को छावनी में तब्दील कर दिया था और इलाके में कर्फ्यू लगा दिया था ऊपर से यह बयान दे दिया कि परिंदा भी पर नही मार पायेगा। राम भक्तों ने इसे चैलेंज के रूप में लिया और पैदल ही अयोध्या की ओर चल पड़े। रेल, बस, सड़क सब बंद थीं यहाँ तक कि नदी में नाव भी नही चलने दी जा रही थी, इसके बावजूद लाखों रामभक्त पैदल ही खेतों की पखडंडी से हो के आयोध्या जा पहुँचे, हज़ारो लोगों ने तो सरयू नदी तैर कर पर की।जिस दिन कारसेवा थी, उस दिन अयोध्या की चप्पे चप्पे में राम भक्त मौजूद थे।
मुल्लायम की सारी पुलिस सारा प्रशासन और सारा सुरक्षा तंत्र देखता रहा और राम भक्तो को नही रोक पाए।
भक्त यदि ठान ले तो आप उसे नही रोक सकते। बल प्रयोग से हालात बिगड़ते ही हैं, इसलिए सरकारें जब तक कि पानी सर से ऊपर ना चढ़ जाये बल प्रयोग से बचते हैं।
जहां तक बात पंचकुला की है - पंचकुला, मोहाली और जीरकपुर दरअसल चंडीगढ़ की satellite cities हैं। चारों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। पंचकुला में किसी को घुसने से रोकने के लिए आपको मोहाली, जीरकपुर और चंडीगढ़ में भी कर्फ्यू लगाना पड़ेगा।
जिकरपुर, मोहाली पंजाब में हैं, चंडीगढ़ एक यूनियन ट्ररीट्री है और पंचकूला हरयाणा में है, इसलिए पंचकुला को सील करना असंभव है और असली बात यह कि आप भक्तों को नही रोक सकते, वो पैदल ही चले आयेंगे और ऐसा ही हुआ भी।
यदि खट्टर आज से एक हफ्ता पहले सख्ती शुरू कर देते तो आज पंचकुला में दो लाख की जगह 5 लाख लोग होते।
सच्चाई यह है कि भारत मे लोकतंत्र नहीं बल्कि भीड़ तंत्र है और उन्मादी भीड़ से लोकतांत्रिक तरीके से नही निपटा जा सकता, उसके लिए आपको उत्तर कोरिया का किम जोंग या फिर चीन बनना पड़ेगा और कोई भी CM किम जोंग नही बनना चाहता।
मैं इस समय पंजाब में हूँ, इंटरनेट काल रात से बंद है, बिजली आज सुबह से गुल है, यह पोस्ट एक मित्र को फोन पर लिखवाई है और उन्होंने मेरी आईडी खोल के इसे लखनऊ से पोस्ट किया है।
मुझे 1990 का अयोध्या का राम जन्मभूमि आंदोलन याद आता है, मुल्लायम जादों ने सात दिन पहले ही फैज़ाबाद संभाद को छावनी में तब्दील कर दिया था और इलाके में कर्फ्यू लगा दिया था ऊपर से यह बयान दे दिया कि परिंदा भी पर नही मार पायेगा। राम भक्तों ने इसे चैलेंज के रूप में लिया और पैदल ही अयोध्या की ओर चल पड़े। रेल, बस, सड़क सब बंद थीं यहाँ तक कि नदी में नाव भी नही चलने दी जा रही थी, इसके बावजूद लाखों रामभक्त पैदल ही खेतों की पखडंडी से हो के आयोध्या जा पहुँचे, हज़ारो लोगों ने तो सरयू नदी तैर कर पर की।जिस दिन कारसेवा थी, उस दिन अयोध्या की चप्पे चप्पे में राम भक्त मौजूद थे।
मुल्लायम की सारी पुलिस सारा प्रशासन और सारा सुरक्षा तंत्र देखता रहा और राम भक्तो को नही रोक पाए।
भक्त यदि ठान ले तो आप उसे नही रोक सकते। बल प्रयोग से हालात बिगड़ते ही हैं, इसलिए सरकारें जब तक कि पानी सर से ऊपर ना चढ़ जाये बल प्रयोग से बचते हैं।
जहां तक बात पंचकुला की है - पंचकुला, मोहाली और जीरकपुर दरअसल चंडीगढ़ की satellite cities हैं। चारों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। पंचकुला में किसी को घुसने से रोकने के लिए आपको मोहाली, जीरकपुर और चंडीगढ़ में भी कर्फ्यू लगाना पड़ेगा।
जिकरपुर, मोहाली पंजाब में हैं, चंडीगढ़ एक यूनियन ट्ररीट्री है और पंचकूला हरयाणा में है, इसलिए पंचकुला को सील करना असंभव है और असली बात यह कि आप भक्तों को नही रोक सकते, वो पैदल ही चले आयेंगे और ऐसा ही हुआ भी।
यदि खट्टर आज से एक हफ्ता पहले सख्ती शुरू कर देते तो आज पंचकुला में दो लाख की जगह 5 लाख लोग होते।
सच्चाई यह है कि भारत मे लोकतंत्र नहीं बल्कि भीड़ तंत्र है और उन्मादी भीड़ से लोकतांत्रिक तरीके से नही निपटा जा सकता, उसके लिए आपको उत्तर कोरिया का किम जोंग या फिर चीन बनना पड़ेगा और कोई भी CM किम जोंग नही बनना चाहता।
मैं इस समय पंजाब में हूँ, इंटरनेट काल रात से बंद है, बिजली आज सुबह से गुल है, यह पोस्ट एक मित्र को फोन पर लिखवाई है और उन्होंने मेरी आईडी खोल के इसे लखनऊ से पोस्ट किया है।
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