'नरेश अग्रवाल' को हमें धन्यवाद देना होगा अगर हिंदुओं की आँखों पर से आठ सौ साल से पड़ा पर्दा हट गया तो!
अगर 'हिंदू' नाम वाले, हिंदुओं का ही ख़ून पी रहे राक्षसों का मुखौटा
उतर गया तो !
आठ सौ साल, से हिंदू नाम के लोग सत्ता में है, कभी बादशाह के दरबार में व उसकी सेवा में, कभी वायसरॉय के दरबार में व उसकी सेवा में, और अब वोट बैंक मैनेजरों के साथ व उनकी सेवा में।
हिंदू नाम एक मुखौटा भर है इनका, ताकि हिंदू दिग्भ्रमित रहे और उसे लगे कि 'हिंदू' भागीदारी है सत्ता में।
इन हिंदू मुखौटाधारीयों का एक ही उद्देश्य रहा है: यथास्तिथि।
ताकि इनका शोषण व लूट चलते रहे।
"इसके लिए इन्होंने सदा ही बादशाहों व वायसरायों को फ़ंड किया।"
हमें "जयचंद" इसलिए याद है क्योंकि गौरी ने उसे मार दिया था। लेकिन कितने जयचंद थे, और हैं, जिन्हें गौरियों ने जीवित रखा ? धन के एवज़ में, या प्रशासन चलाने के लिए, या सम्पूर्ण विद्रोह रोकने के लिए, कितने नाम के हिंदू थे, और हैं?
जो "सत्ता में भागीदार" बन कर बाक़ी हिंदुओं के लिए "झूठे भरोसे" की अफ़ीम बन गए और
आज भी बने हुए है।
"हिंदुओं" को चिन्हित करना होगा,
इन "हिंदू नाम" वाले, लेकिन हिंदुओं की जड़ो को दीमक की तरह खोखला कर रहे, रुपयों के लिए कब के अपने धर्म, अपनी आत्मा, व अपने सम्मान को बेच चुके, लोगों को।
नरेश अग्रवाल का "मुखौटा" तो उसकी क्षणिक ग़लती से गिर गया.... बाक़ियों का उतारना पड़ेगा।
अगर 'हिंदू' नाम वाले, हिंदुओं का ही ख़ून पी रहे राक्षसों का मुखौटा
उतर गया तो !
आठ सौ साल, से हिंदू नाम के लोग सत्ता में है, कभी बादशाह के दरबार में व उसकी सेवा में, कभी वायसरॉय के दरबार में व उसकी सेवा में, और अब वोट बैंक मैनेजरों के साथ व उनकी सेवा में।
हिंदू नाम एक मुखौटा भर है इनका, ताकि हिंदू दिग्भ्रमित रहे और उसे लगे कि 'हिंदू' भागीदारी है सत्ता में।
इन हिंदू मुखौटाधारीयों का एक ही उद्देश्य रहा है: यथास्तिथि।
ताकि इनका शोषण व लूट चलते रहे।
"इसके लिए इन्होंने सदा ही बादशाहों व वायसरायों को फ़ंड किया।"
हमें "जयचंद" इसलिए याद है क्योंकि गौरी ने उसे मार दिया था। लेकिन कितने जयचंद थे, और हैं, जिन्हें गौरियों ने जीवित रखा ? धन के एवज़ में, या प्रशासन चलाने के लिए, या सम्पूर्ण विद्रोह रोकने के लिए, कितने नाम के हिंदू थे, और हैं?
जो "सत्ता में भागीदार" बन कर बाक़ी हिंदुओं के लिए "झूठे भरोसे" की अफ़ीम बन गए और
आज भी बने हुए है।
"हिंदुओं" को चिन्हित करना होगा,
इन "हिंदू नाम" वाले, लेकिन हिंदुओं की जड़ो को दीमक की तरह खोखला कर रहे, रुपयों के लिए कब के अपने धर्म, अपनी आत्मा, व अपने सम्मान को बेच चुके, लोगों को।
नरेश अग्रवाल का "मुखौटा" तो उसकी क्षणिक ग़लती से गिर गया.... बाक़ियों का उतारना पड़ेगा।
No comments:
Post a Comment