Thursday, 17 August 2017

असली रामधुन जिसे बदल दिया गांधी ने

कांग्रेसियों ने आज़ादी के बाद से ही हिंदुओं की पीढ़ी को कायर बनाने की सोची समझी रणनीति बना ली थी जो आज तक जारी है इसकी शुरुवात कायर मोहन गांधी ने कर दी थी....गौरवशाली इतिहास को तो छुपाया ही पूज्य पवित्र गीता के श्लोक को आधा प्रचारित किया सांथ ही प्रसिद्ध रामधुन को तो बदल ही दिया...""अहिंसा परमो धर्म:"" जबकि पूर्ण श्लोक ""अहिंसा परमो धर्म: हिंसा तथैव च""।
अर्थात - अहिंसा मनुष्य का परम धर्म है
और धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उस से भी श्रेष्ठ है..🕉
गांधी ने सिर्फ इस ☝श्लोक को ही नहीं बल्कि उसके अलावा उन्होंने एक प्रसिद्ध भजन को बदल दिया...
रघुपति राघव राजा राम'.....
इस प्रसिद्ध-भजन का नाम है.
."राम-धुन" .
जो कि बेहद लोकप्रिय भजन था.. कमीने ने इसमें परिवर्तन करते हुए अल्लाह शब्द जोड़ दिया..
गांधी द्वारा किया गया परिवर्तन और असली भजन👇🏿
गाँधी का भजन......
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान...जबकि
असली राम धुन भजन...
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम
सुंदर विग्रह मेघश्याम
गंगा तुलसी शालीग्राम
भद्रगिरीश्वर सीताराम
भगत-जनप्रिय सीताराम
जानकीरमणा सीताराम
जयजय राघव सीताराम
बड़े-बड़े पंडित तथा वक्ता भी इस भजन को गलत गाते हैं, यहां तक कि मंदिरो में भी उन्हें रोके कौन?
'श्रीराम को सुमिरन' करने के इस भजन को जिन्होंने बनाया था उनका नाम था लक्ष्मणाचार्य
ये भजन
"श्री नमः रामनायनम"
नामक हिन्दू-ग्रन्थ से लिया गया है।
अतः हम सबकी जिम्मेदारी है जितना हो सके लोगों को बताएं....
🙏जय जय श्री राम...🙏

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