Monday, 28 August 2017

राहुल बाबा गए नॉर्वे

राहुल गांधी एक अनिच्छुक नेता और कृत-संकल्पित मसखरे हैं | मेरे लिए जिज्ञासा केवल इतनी है कि वे दूसरी बात को किस डिग्री तक समझ पाए हैं, क्योंकि मैं इतना तो जानता हूँ कि वे जानते हैं कि वे क्या हैं और इसीलिए जब हाल ही में उनकी जीजी और जीजाजी ने अपने पुत्र के नाम में 'राजीव' एड किया तो इसमें सहमति और परामर्श राहुल गांधी का भी रहा होगा |

और इसीलिए वे कांग्रेस के दुर्दिनों को, सत्ता पक्ष और सोशल मीडिया के हमलों को किसी जहर की भांति गटक रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं एक न एक दिन, बेशक चार टर्म के बाद ही सही जब कांग्रेस का नम्बर आएगा तब तक वे अपने विरोधियों द्वारा उलीचा गया सारा जहर पी जायेंगे और सत्ता की चाबी अपने भांजे के हाथ में सौंप सकेंगे |

अन्यथा मुझे कोई अन्य कारण नजर नहीं आता कि आखिर क्या वजह है वे भारत की राजनीति और वर्तमान समय में मुद्दों की समझ से जूझ रहे हैं | मेरे देखते-देखते लालू जी के दोनों पुत्र भी सक्सेसफुली लॉन्च हो गए, जिसमें दूसरे वाले; पता नहीं वे बड़े हैं या छोटे - तेजप्रताप तो अदभुत हैं | कल पटना की रैली में उन्होंने बिना रुके तीन बार शंख फूंका |

जिन लोगों का शंख से कभी वास्ता नहीं पड़ा है उनको मैं बता दूं कि एक बार शंख बजाने में लगातार आधा घंटा दौड़ने के बराबर एनर्जी लगती हैं लेकिन उन्होंने तीन बार शंख फूंककर साबित कर दिया कि उनके भीतर स्टेमिना का लेवल क्या है ? बहरहाल सेट तो मुलायम सिंह जी के सुपुत्र अखिलेश जी भी हो गए हैं | अच्छा बोल लेते हैं, अब तो उनका चाचाओं से भी पिंड छूट गया है तो खूब खुश भी रहते हैं |

लेकिन राहुल जी क्या कर रहे हैं ? वे वही कर रहे हैं जो राजा-रजवाड़ों के समय महलों के भीतर रहने वाली रानियाँ करती थीं - गहने बनवाना और गहने तुड़वाना | अर्थात वे कागज पर लिखते हैं, कागज़ फाड़ते हैं जबकि मेरा आज भी मानना है कि अगर वे डॉ. साहब की दस साला सरकार के दौरान कोई भी गया गुजरा मंत्रालय लेकर, किसी पीआर एजेंसी के सहयोग से योजनाओं के पत्थर रखने और फीता काटने वाले काम भी कर डालते तो कांग्रेस और उन्हें इतने बुरे दिन न देखने पड़ते |

लेकिन जैसा कि मैंने कहा कि वे एक अनिच्छुक नेता हैं इसलिए नेतागीरी से परहेज करते हैं लेकिन उनके अंकिल लोग मानते नहीं हैं, उन्हें रोड शो, रैलियों और सभाओं में भेज देते हैं, द्विवेदी अंकिल उनके भाषण लिख देते हैं और कनिष्क भैया उन्हें अल-जजीरा चैनल से फीड बैक दे देते हैं तो उन्हें पता ही नहीं चलता है कि वे जहाँ गए थे वहां क्या 'कारनामा' करके आये हैं |

उनके मुखपत्र 'ऑफिस ऑफ़ आरजी' के अनुसार वे इन दिनों नॉर्वे राष्ट्र की आधिकारिक यात्रा पर हैं | वहां के विदेश मंत्रालय ने उन्हें पीली चिट्ठी भेजकर बुलाया है |  नॉर्वे देश तो मासूम है ही, जैसा कि मैं मेरे आदरणीय मित्र 'प्रवीण जी' के माध्यम से अवगत होता रहता हूँ लेकिन अब तो मैं वहां की सरकार की मासूमियत का कायल हो गया हूँ | मतलब नॉर्वे सरकार ने लगता है बुद्धत्व प्राप्त कर लिए है जहाँ उनके लिए 'नरेन्द्र' या 'राहुल' सिर्फ ह्यूमन बीइंग हैं | वे उसके लिए नफा और नुकसान नहीं हैं |

बहरहाल मैंने प्रवीण जी से भी कहा है कि उन्हें नॉर्वे में जैसे ही राहुल जी की सभाओं, संबोधनों, रोड शोज या किसी भी प्रकार की ज्ञात-अज्ञात गतिविधि की जानकारी प्राप्त हो मुझे कृपया तुरंत सूचित करें, भारत वर्ष में, मैं उनका 'शुभचिंतक' बेसब्री से उनकी खबरों का इन्तजार कर रहा हूँ |

Whatsapp overdose

*आज हर आदमी के पास एवरेज 500 से ज्यादा पोस्ट आ जाती है जो अधिकतर रिपीट होती है।  अधिकांश पोस्ट बिना देखे लोग डिलीट मार देते है।अब तो वाट्सप एलर्जी होने लगी है।*

कोई सुविधा मिली है तो इसका ये मतलब नहीं के उसका दुरूपयोग करे और उसका importance ही ख़त्म कर दें।

और ये सबके साथ हो रहा है,

*जब सब परेशान हैं तो आइये कुछ ऐसा करें :*

1  गुड़ मोर्निंग, सुप्रभात और फूल फुलवारी, की फ़ोटो भेजना बंद करे

2  कोई नई बात जो सबके हित की हो केवल उसे पोस्ट करें ताकि आपकी एक पहचान बने कि आप बेकार पोस्ट नही भेजते।

3.अंधविश्वास फैलाने वाले मेसिज बिलकुल ना भेजें।

4.अपने ग्रुप में केवल वही बात लिखें जो कि ग्रुप में आपके साथियों को आगे बढ़ने में मदद करें

5. जिस उद्देश्य के लिए ग्रुप बनाया है केवल उसकी बात करें लंबी कहानी डाल कर उसे बोरिंग ना बनाएँ।

*6.जन्मदिन सालगिरह या और कोई भी बधाई संदेश उस व्यक्ति के पर्सनल नंबर पर ही दे ग्रुप में न डाले.*

7. आशा है कि आप इस विषय पर विचार करेंगे

धन्यवाद

चीन ने मानी भारत की ताकत

चीन ने अपनी सेना हटाने की घोषणा करके तीसरे विश्व युद्ध और उसके बाद होने वाले अपने विघटन को बचा लिया। भारत की इस दृढ़ता का चीन के पास कोई जबाब नहीं निकल रहा था। जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, इज़राइल, वियतनाम, दक्षिणी कोरिया, मंगोलिया, बोत्सवाना, होन्ग कॉन्ग, ताइवान, इंडोनेशिया, मलेशिया और कई मेकांग व यूरोपीय देशों की भारत के प्रति समर्थन की प्रतिबद्धता ने चीन को भविष्य की आहट शायद दे दी थी। इसीलिये चीन ने अड़े रहने की बजाय थूक कर चाट लेने में ही अपनी भलाई समझी। इस घटना के बाद विश्व राजनीति में चीन की औकात 2 कौड़ी के कुत्ते जैसी हो गयी है और भारत एक महाशक्ति के तौर पर उभर कर आया है जिसने चीन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। भारत की इस आक्रामक कूटनीति की सफलता के पीछे निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्व मंच पर धमाकेदार कूटनीति एवं विदेशी दौरों का हाथ है।

झुक गया चीन

#एकदम_ताज़ी_असली_खबर
#डोकलम_पर
#केवल_मेरी_Id_पर😂

हाँ तो अफवाहों का बाजार गर्म हो चुका है , चेस्ट थम्पिंग हो चुकी है

इससे पहले की अफवाहें आपके दिमाग में बस जाएँ , एक असली और जिम्मेदार ID होने के नाते मेरा ये कर्तव्य है कि मैं असली बात आप तक पहुँचाऊँ ताकि आपको पूरा मैटर सही से समझ में आ जाए

भारत सरकार ने साफ़ कहा कि धीरे धीरे दोनों ही भारत और चीन की सेनाएँ डोकलम से हटेंगी

इसे अंग्रेजी में expeditious disengagement कहते हैं , सेनाएँ आज ही एक दिन में नही हटेंगी , इसमें उचित समय दोनों पक्षो द्वारा लिया जाएगा

पर ये प्रक्रिया आज से ही शुरू हो जायेगी ।।

भारत ने साफ़ कहा है कि दोनों पक्षो की सेनाएँ हटेंगी ।

अब चीन में इसको कैसे देखा जा रहा ?

चीन में दो प्रकार का मीडिया है एक थोड़ा सा चूतिया है एक महा चूतिया है ( ऐसा गूढ़ ज्ञान मैं बहुत पढ़ने के बाद बता रहा हूँ उनकी मीडिया )

जो थोड़ा सा चूतिया है वो मात्र 10% है वो कह रहा की

डोकलम विवाद दोनों सरकारों ने निबटा लिया है , भारत और चीन सेना हटाएंगे लेकिन चीन डोकलम में पेट्रोलिंग करता रहेगा , हम अपनी sovereignty ( संप्रभुता ) से कोई समझौता नही करेंगे ।।

अब इन गधों से पूछो पेट्रोलिंग करने की कौन सी लड़ाई है ?
हम तो सड़क रुकवाने गये थे वो तुम मान लिए बात खत्म ।। अब करो पेट्रोलिंग ससुर 😂😂

उतनी ऊँचाई पे कितना पेट्रोलिंग करोगे बे ? ठण्ड में तो वैसे भी सब बन्द रहता है 😂😂

और दूसरा महा चूतिया मीडिया है जो बहुसंख्यक है जो कह रहा की

भारत ने सेना हटाने पर काम शुरू किया , डोकलम में हमारी संप्रभुता बरक़रार रहेगी

गज़ब चूतिये हैं , अबे अगर हमको हटना ही होता तो 3 महीने से वहाँ खो खो खेल रहे थे हमारे जवान

अब इंटरनेशनल मीडिया की बात करें तो

उनका साफ़ रुख भारत सरकार के स्टेटमेंट पे है और चीनी सरकार ने भी उसी स्टेटमेंट को माना है ।।

हालाँकि साफ़ चायनीज सरकार ने भी नही कहा कि हम सीधे हट रहें भारत के साथ

चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री की spokeswomen Hua Chunying ने कहा

China will continue to exercise sovereignty rights to protect territorial sovereignty in accordance with the rules of the historical boundary.. Chinese troops would continue to patrol the Doklam region .

China hopes India respects the historical boundary and works with China to protect peace along the border on the basis of mutual respect of each other's sovereignty..

इनका स्टेटमेंट पढ़ने से साफ़ पता चलता है , चीन भी पीछे हटा है फिलहाल ,

क्योंकि उनका कहना है हमारी सेना पेट्रोलिंग करती रहेगी

जबकि हमारी लड़ाई सड़क निर्माण को रुकवाने की थी , उनके एरिया में उनकी पेट्रोलिंग रोकने की नही

आप पीछे हट जाइये अपने एरिया में जी भर के पेट्रोलिंग करिये ,
हमें कोई दिक्कत नही होगी , पर विवादित जमीन पर सड़क बनाएँगे तो इसमें आप हार चुके हैं ,

राष्ट्र को इस सफलता पर बधाईं
मोदी डंटे रहे , तीन महीने
उनको भी बधाईं ।।।

आगे भी हम झुकेंगे नही , इसका साफ़ सन्देश है ।।

चीन की हेकड़ी निकाल दी मोदी ने

चीन बोला युद्ध कर के रहेंगे।

मोदी जी बोले नहीं बस 91 चीनी प्रोडक्ट्स पे डोपिंग ड्यूटी लगा दिया।

चीन बोला ये भारत को बहुत मँहगा पड़ेगा। हमारी सेनाएं पहाड़ से भी ज्यादा अडिंग हैं। हम भारत को बस 2 हप्ते का वक्त देते हैं। सेना हटा लो नहीं तो हम उखाड़ देंगे तंबू तुम्हारा।

उधर कुछ यूपी में अपने जीजा के दम पर बने मठा लोग जिनको योगी जी सीधा रिपोर्ट करते हैं,नेे घोषणा कर दी के भारत पर युद्ध थोप दिया गया है और ये युद्ध भारत को लड़ना पड़ेगा। पर मोदी चुप। मंत्रालय ने सभी चीनी मोबाइल कंपनियों को नोटिस भेजा के डेटा चोरी पर 2 हप्ते में जवाब पेस करो नहीं तो सरकार कार्यवाही करेगी।

चीन- हीहीही मोदी जी, अब क्या हम मजाक भी नहीं कर सकते? अब तो अप्पो वीवो के 400 चीनी वापस बुला लो यार। श्योमी तो मेड इन इंडिया लिखने लग गया। क्यों मेरे 59 हजार करोड़ के टर्न ओवर पे लात मार रहे हो। बिना युद्ध किये ही हमारे 2-4 लाख चिंको को मारने का प्रोग्राम सेट कर दिए आप तो। रहम करो मालिक ☺

मोदी जी -  जवाब जापान देगा। जापान -  हीहीही,
ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे,
चिंको की वाट लगा के ही छोड़ेंगे ☺☺

Sunday, 27 August 2017

भगवान अयप्पा : भगवान विष्णु के नौवें अवतार

#भगवान_अयप्पा

विष्णु जी का 9 वां अवतार

केरल में एक जगह है पेरियार टाइगर रिजर्व।

(पेरियार को तो आप जानते ही होंगे ? 500 दिलीप चु मंडल 200 अम्बेडकर 100 मायावती 100 केजरी को मिला कर एक पेरियार बनता है)

खैर ये बाद में केरल के पतनमथिट्टा जिले के पेरियार टाइगर रिजर्व की पहडियो में मंदिर है #सबरीमाला ये मंदिर है भगवान अयप्पा का। यहाँ कुम्भ मेले से ज्यादा तीर्थ यात्री जाते हैं हर साल यहाँ 10 करोड़ श्रद्धालु आते हैं।        

सबरीमाला मंदिर भी भारत के अमीर मंदिरों में आता है सोना ही सोना है इतना जितना अमेरिका के पास नहीं। ये मंदिर है विष्णु जी के 9 वां अवतार भगवान अयप्पा जी का।

गोरे आये तो उन होने गोतम बुद्ध को 9वां अवतार बना दिया। गोतम बुद्ध भी संत थे हिन्दू थे गौतम गोत्र से थे। मगर अवतार नहीं थे। यहाँ इन की चाल गलत पड़ गयी जिस को सुधारने के लिए इन होने इतिहास में तारीखे आगे पीछे कर दी आदि शंकराचार्य को 788 फिर बोद्धओ को हराना आदि कहानियां लिख दी टोटल कनफूजन पैदा कर दिया।

उस समय के गोरे लगे हुए थे हिन्दू धर्म को नीचा करने में जो आज भी बदस्तूर जारी है। कभी भगवा आतंकवाद तो कभी कोई हिन्दू गुरु रेप हत्या के कारण जेल में। 10 करोड़ श्रद्धालु प्रति वर्ष आते हैं तो इस को भी विवादों में फसाओ। वैसे केरल को बर्बाद करने का कारण हिन्दू संस्कृति की मजबूत जड़े है ।

#ayyappa_temple_controversy इस मंदिर को हमेशा विवादों में रखा गया अभी ताज़ा विवाद ये ही की महिलाओ को एंटरी क्यूँ नहीं, #मुल्लापेरियार_बांध जो पेरियार नदी पर है कभी काले इसाईंयो का हिन्दू यात्रियों पर पत्थर मरना। (नाम आएगा पत्थर मारने वाले धर्म का ) कभी बोला जाता है की ये तो गोतम बुद्ध हैं जिन का मंदिर बना दिया। ऐसे ही हजारो विवाद मगर हिन्दू श्रद्धालु की संख्या बढती गयी।

ऐसा ही एक विवाद बताया गया की ये शिव और विष्णुजी के पुत्र है। जब विष्णु जी ने मोहनी रूप धरा तो शिव जी मोहित हो गए और अय्यप्पा जी का जन्म हुआ। इतनी घटिया बात सुन कर लोग खुश होते हैं शिव और विष्णु जी के समलैंगिक सम्बन्ध और समलैंगिक संबंधों की संतान हैं। ये नाटक है अंग्रेजो का जिस में पूरा साथ देते हैं 3 श्री रवि। ये जहर पुराणों में भरा हुआ है । #homosexual_sexual_activities #Section_377 #निजता_का_अधिकार ।      

सब मिशनरी का खेल है।

भगवान अयप्पा के बारे में ज्यादा नहीं मिलता और जो मिलता है उस पर भरोसा नहीं होता। केरल से एक नाम जुडा है भगवान् परशुराम का। केरल को बसाने वाले भगवान् परशुराम ही हैं। भगवान् परशुराम का जिक्र रामायण में भी है और महाभारत में भी है ये भीष्म , द्रोणाचार्य व कर्ण के गुरु भी रहे हैं। सरस्वती नदी के सूखने पर ये केरल चले गए थे। इस दोरान भी बहुत कहानिया हैं जिन में से एक क्षत्रियों से पृथ्वी खाली करने वाली भी है ।    

तब के समय ही एक राजा हुआ करते थे पांडलम के राजशेखर । कुछ कहते हैं की भगवान अयप्पा उन को नदी किनारे मिले थे। मगर पैदा ही हुए होंगे तो राजा राजशेखर के पुत्र रूप में भगवान अयप्पा का जन्म हुआ ये जब पैदा हुए थे तो इन के गर्दन पर एक मणि लगी हुयी थी जिस वजह से इन का बदन सोने से चमक रहा था जिस वजह से इन का नाम मानिकांतन अय्यप्पन भी था और प्यार से हरी हरा बुलाया जाता था।

भगवान अयप्पा के गुरु थे परशुराम जी वेदों के ज्ञाता अस्त्र शस्त्र शास्त्र के ज्ञाता । #कलरीपायट्टु।

ये युद्ध कला दुनिया की सब से पुरानी युद्ध कला, (कमेन्ट बॉक्स में एक विडिओ लिंक है ) ये युद्ध कला परशुराम जी की ही देन है। परशुराम जी से ज्ञान और युद्ध कला सिखने के बाद भगवान अयप्पा ने बहुत छोटी उम्र में राजकार्य सम्हाल लिया था। बहुत कुछ है इन के बारे में ।

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मेरा मुद्दा ये ही की बहुत बड़ा खिलवाड़ किया गया है हिन्दू संस्कृति के साथ और चतला ही जा रहा है आज भी हिन्दू के दिमाग से खेला जा रहा है । ऐसा ही रहा तो वो दिन दूर नहीं जब भारत ईराक जैसा हो जायेगा फिर अफ्रीका जैसा।            

जय श्री राम

Saturday, 26 August 2017

जब ओशो बन्द थे जेल में

कल रात हरियाणा के पंचकोला की घटना को सुन व देख कर अचानक ओशो बहुत याद आये।
आपको शायद याद हो अमेरिका मे ओशो को बिना किसी गिरफ़्तारी वारंट के बिना किसी प्राथमिकी के अमरीकी पुलिस ने अचानक गिरफ़्तार कर लिया था और १२ दिनों तक एक निर्दोष और निहत्थे व्यक्ति को बेड़ियों, हथकड़ियाँ, और ज़ंजीरों से जकड़ कर विभिन्न जेलों मे घुमाते हुऐ उन्हे यातना के कई आयामों से गुज़ारा। विश्व मीडिया बताती है, उस समय पूरे विश्व मे ओशो के अनुयायियों की संख्या करोड़ों मे थी पर पूरे विश्व मे कही कोई अशांति या हिंसक प्रदर्शन नही हुए। ओशो जिस-जिस जेलों मे पहुँचते थे वहाँ सुबह-सुबह आदमियों की भीड़ नही वल्कि फूलो से लदे ट्रक पहुच जाते थे। अकलोहोमा जेल के जेलर ने अपनी आत्मकथा मे लिखा है मै सेवानिवृत्ति के क़रीब था मैने बहुत क़ैदियों को अपनी जेलें मे आते जाते देखा है पर जब ये शख्श(ओशो) मेरी जेल मे आया तो मैने महसूस कि और देखा कि मेरी जेल एक चर्च के रुप में बदल गई थी। पूरी जेल फूलो से भर गई थी कोई जगह ख़ाली नही थी। तब मै ख़ुद उस शख़्स के पास गया और अनायास ही मेरी आँखो से अश्रु बहने लगे, मै समझ नही पा रहा था और भरे गले से मैने उनसे पुछा कि, आप ही बताइए इन फूलो का मै क्या करु? ओशो में मेरी तरफ प्रेम पुर्ण दृष्टि डाली और बोले इन फूलो को पूरे शहर से स्कूलों और कालेजो मे भिजवा दिया जाय ये मेरी तरफ से उस विद्यार्थियों को भेंट है जो अभी शिक्षा ग्रहण कर रहे है।
जब ओशो को जेल से अदालत लाया जाता था तब उनके लाखों अनुयायी नगर वासियों को फूल भेंट करते थे और शांतिपूर्ण ढंग से प्रतीक्षारत रहते कि कब ओशो कोर्ट से बाहर आयेगे। जब ओशो कोर्ट से पुन: गुज़र जाते तो कोर्ट से लेकर जेल तक की सड़क फूलो से पटी होती थी। पूरे संसार से कही ऐसी कोई ख़बर नही थी कि ओशो किसी अनुयायी ने को उग्र आचरण किया या उग्र व्यक्तव्य दिया हो। जब भी कोई उनसे ओशो के सम्बध मे कुछ पुछता तो आँखो मे आँसुओ के साथ यही कहते- प्रकृति कुछ प्रयोग कर रही है, हाँ ये प्रयोग हमारे लिये थोडा असहनीय और कष्टप्रद जरुर है पर जैसी परमपिता की मर्ज़ी। हमारे सद्गुरू ने हमे ये सिखा दिया है कि कैसे परम स्वीकार के भाव मे जिया जाता है।
जिस जेल से ओशो को जाना होता, वहाँ का जेलर अपने परिवार के साथ उन्हे विदा करने के लिये उपस्थित होता और ओशो से आग्रह करता कि क्या मेरे परिवार के साथ आप अपनी एक फ़ोटो हमे भेंट करेगे? और ओशो मधुर मुस्कान से मुस्कराते हुए वही खड़े जाते और कहते कि आओ।
बहुत पहले जब ओशो भारत मे थे तब उन पर छूरा फैंका गया। ओशो ने तत्क्षण कहा, कोई अनुयायी उन सज्जन को कुछ भी न कहे और उन्हे छुए भी नही। वे कुछ कहना चाहते है, ये उनके कहने का ढंग है। उन्हे बिल्कुल छोड़ दिया जाए फिर अगले दिन ओशो ने प्रवचन के मध्य कहा- मै यह देख कर आनंदित हूँ कि तुम मे से किसी ने उन सज्जन को कोई चोट नही पहुँचाई , वल्कि प्रेम से उन्हे बाहर जाने दिया गया। यही मेरी शिक्षा है। कल कोई मेरी हत्या का भी प्रयास करे या जान भी लेले। लेकिन तुम उन्हे प्रेम ही देना ।
*गुरुदेव श्री जगदीश प्रसाद पाण्डेय जी कहते हैं सच्चे सद्गुरू की हमे शिक्षा और दीक्षा उनके अनुयायियों में परिलक्षित होती है। अनुयायी शब्द बडा समझने वाला है- अपने गुरू के बताये मार्ग पर ठीक ढंग से चलने वाले को अनुयायी कहते है । शांत, अनुशासन-शील, सर्व-स्वीकार्य और सुदृढ़ अनुयायी ही गुरु की सदाशयता को परिभाषित करते हैं।*
कल से मै चकित हूँ कि शांति के दूत बाबा रामरहीम ने क्या अद्भुत शिक्षा अपने भक्तों को दी है- पूरे शहर को आग मे झोंक दिया, ३० से ज्यादा लोग मारे गये और न बाबा और न ही उनके किसी प्रधान ने कोई ऐसा प्रयास किया जिससे यह अराजकता रुक सके और न ही कोई व्यक्तव्य दिया जिससे चरम पर पहुँची हिंसा और उग्रता ठहर सके।
बहुत आश्चर्य होता है!!!!!
साभार🦋🙏🏻
*जय - जगदीश*